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दिल्ली हाई कोर्ट का काजोल को बड़ा समर्थन: पहचान के दुरुपयोग पर लगी रोक!

दिल्ली हाई कोर्ट ने काजोल के नाम, छवि और पहचान के दुरुपयोग पर रोक लगाने का महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। यह निर्णय आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और सोशल मीडिया के माध्यम से पहचान के दुरुपयोग के बढ़ते मामलों के बीच आया है। अदालत ने सभी संबंधित पक्षों को काजोल की पहचान का उपयोग करने से रोका है और ई-कॉमर्स प्लेटफार्मों को निर्देश दिया है कि वे 72 घंटे के भीतर गलत उत्पाद हटाएं। इस मामले की अगली सुनवाई 23 अप्रैल को होगी।
 
दिल्ली हाई कोर्ट का काजोल को बड़ा समर्थन: पहचान के दुरुपयोग पर लगी रोक!

दिल्ली हाई कोर्ट का महत्वपूर्ण फैसला


नई दिल्ली, 25 फरवरी। दिल्ली उच्च न्यायालय ने बॉलीवुड की मशहूर अभिनेत्री काजोल के पक्ष में एक महत्वपूर्ण निर्णय सुनाया है। अदालत ने उनके नाम, छवि, आवाज और पहचान के गलत उपयोग पर तात्कालिक रोक लगाने का आदेश दिया है।


यह निर्णय उस समय आया है जब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, डीपफेक तकनीक और सोशल मीडिया के माध्यम से मशहूर हस्तियों की पहचान का दुरुपयोग तेजी से बढ़ रहा है।


सुनवाई के दौरान न्यायालय ने स्पष्ट किया कि बिना अनुमति किसी की पहचान का उपयोग करना अवैध है और यह व्यक्ति की गरिमा पर सीधा हमला है। यह आदेश जस्टिस ज्योति सिंह की एकल पीठ द्वारा दिया गया।


काजोल ने कई वेबसाइटों, ई-कॉमर्स प्लेटफार्मों, सोशल मीडिया इंटरमीडियरीज, एआई चैटबॉट साइटों और कुछ अज्ञात व्यक्तियों के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई थी। इन अज्ञात व्यक्तियों को कानूनी भाषा में 'जॉन डो' कहा जाता है, जिनकी पहचान अभी तक ज्ञात नहीं है, लेकिन जो ऑनलाइन गलत गतिविधियों में संलग्न पाए गए हैं।


काजोल की याचिका में आरोप लगाया गया कि उनकी तस्वीरों और नाम का उपयोग करके ऑनलाइन उत्पाद बेचे जा रहे हैं। इसके अलावा, एआई की सहायता से उनकी नकली छवियाँ बनाई जा रही थीं। कुछ वेबसाइटों पर उनकी पहचान का उपयोग कर अश्लील एआई चैटबॉट चलाए जा रहे थे।


दिल्ली हाई कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि काजोल भारतीय फिल्म उद्योग की एक प्रतिष्ठित और सम्मानित अभिनेत्री हैं, जिनका करियर लगभग चार दशकों का है। उन्हें पद्मश्री जैसे सम्मान से भी नवाजा गया है। उनकी पहचान एक मजबूत ब्रांड है, जिसे उन्होंने वर्षों की मेहनत से बनाया है। बिना अनुमति इस पहचान का उपयोग करना कानून के खिलाफ है और अदालत का हस्तक्षेप आवश्यक है ताकि किसी भी गलत लाभ को रोका जा सके।


कोर्ट ने कहा कि जो वेबसाइटें और ऑनलाइन मार्केटप्लेस काजोल के नाम और छवि वाले उत्पाद बेच रहे थे, यदि वे घटिया गुणवत्ता के हुए, तो इससे काजोल की प्रतिष्ठा को नुकसान हो सकता है।


जज ज्योति सिंह ने कहा, 'सभी दस्तावेजों और शिकायतों को देखने के बाद यह स्पष्ट है कि काजोल का मामला मजबूत है। यदि तुरंत रोक नहीं लगाई जाती, तो उन्हें नुकसान हो सकता था, जिसकी भरपाई बाद में संभव नहीं है।'


अदालत ने इस पर अंतरिम रोक लगाने का निर्णय लिया।


इस आदेश के तहत, सभी आरोपियों और अज्ञात व्यक्तियों को काजोल की पहचान के किसी भी प्रकार के उपयोग पर रोक लगा दी गई है। इसमें उनका नाम, छवि, आवाज, चेहरा, हाव-भाव और उनकी पहचान से संबंधित हर पहलू शामिल है। विशेष रूप से एआई, जनरेटिव एआई, डीपफेक, फेस मॉर्फिंग और चैटबॉट जैसे उपकरणों के उपयोग पर सख्त रोक लगाई गई है।


कोर्ट ने ई-कॉमर्स प्लेटफार्मों और उत्पाद बेचने वालों को आदेश दिया है कि वे 72 घंटे के भीतर काजोल से संबंधित सभी गलत उत्पादों को हटाएं और संबंधित लिंक डिलीट करें। सोशल मीडिया और वीडियो प्लेटफार्मों को भी आपत्तिजनक पोस्ट और वीडियो हटाने के निर्देश दिए गए हैं। वीडियो प्लेटफार्म यूट्यूब को भी निर्देश दिए गए हैं।


इसके अलावा, डिपार्टमेंट ऑफ टेलीकम्युनिकेशन और यूनियन मिनिस्ट्री ऑफ इलेक्ट्रॉनिक्स एंड इन्फॉर्मेशन टेक्नोलॉजी को भी आदेश दिया गया है कि वे अश्लील और आपत्तिजनक सामग्री होस्ट करने वाली वेबसाइटों को 72 घंटे के भीतर ब्लॉक करें। इस मामले की अगली सुनवाई 23 अप्रैल को होगी।


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