दिलजीत दोसांझ की फिल्म 'सतलुज' पर बैन: जानें इसके पीछे की पूरी कहानी
फिल्म 'सतलुज' का विवाद
मुंबई, 06 जुलाई (वेब वार्ता)। दिलजीत दोसांझ की नई फिल्म 'सतलुज' इन दिनों विवादों में घिरी हुई है। इस फिल्म को 3 जुलाई को ओटीटी प्लेटफॉर्म पर रिलीज किया गया था, लेकिन महज 48 घंटे के भीतर इसे भारत में बैन कर दिया गया। आइए जानते हैं कि यह विवाद कैसे शुरू हुआ।
फिल्म की कहानी
यह फिल्म पंजाब के मानवाधिकार कार्यकर्ता जसवंत सिंह खालड़ा के जीवन पर आधारित है। खालड़ा ने 1984 से 1994 के बीच पंजाब में लापता हुए हजारों लोगों के मामलों की जांच की थी।
उनकी इस जांच ने इस संवेदनशील मुद्दे को राष्ट्रीय स्तर पर उठाया। 1995 में खालड़ा लापता हो गए थे, और 10 साल बाद पंजाब पुलिस के चार अधिकारियों को उनके अपहरण और हत्या का दोषी ठहराया गया।
फिल्म का नाम बदलने की कहानी
फिल्म का नाम पहले 'घल्लूघारा' रखा गया था, जिसका अर्थ 'नरसंहार' है। सेंसर बोर्ड ने इस नाम पर आपत्ति जताई। इसके बाद इसे 'पंजाब 95' नाम दिया गया, लेकिन राजनीतिक कारणों से इसे कुछ फिल्म फेस्टिवल्स से हटा दिया गया। अंततः, इसे 'सतलुज' नाम से रिलीज किया गया।
सेंसर बोर्ड के साथ संघर्ष
फिल्म को भारतीय सिनेमाघरों में रिलीज करने के लिए मेकर्स को सेंसर बोर्ड के साथ लंबी कानूनी लड़ाई लड़नी पड़ी। रिपोर्ट्स के अनुसार, सेंसर बोर्ड ने फिल्म में 127 कट्स और कई बदलावों की मांग की।
इस वजह से फिल्म को भारतीय सिनेमाघरों में रिलीज नहीं किया जा सका और इसे केवल कुछ चुनिंदा देशों में ही प्रदर्शित किया गया।
ओटीटी पर बैन
3 जुलाई को जी5 पर रिलीज होने के बाद, फिल्म को 5 जुलाई को बैन कर दिया गया। जी5 ने इस बारे में कोई स्पष्ट कारण नहीं बताया, लेकिन कहा कि वे फिल्म के मेकर्स के साथ खड़े हैं और इसे जल्द ही वापस लाने की कोशिश कर रहे हैं।
दिलजीत का पूर्वानुमान
दिलजीत दोसांझ ने इस फिल्म को अपने करियर का महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट बताया। दिलचस्प बात यह है कि उन्होंने पहले ही इस बैन का अंदाजा लगा लिया था और अपने फैंस से कहा था कि इसे जल्द ही हटा दिया जाएगा।
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