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जैकी श्रॉफ ने संजीव कुमार को दी श्रद्धांजलि, साझा की पुरानी यादें

बॉलीवुड अभिनेता जैकी श्रॉफ ने संजीव कुमार की पुण्यतिथि पर उन्हें याद करते हुए एक भावुक पोस्ट साझा किया। उन्होंने संजीव की एक पुरानी तस्वीर के साथ उनके प्रति अपने प्रेम का इजहार किया और 1972 के गाने 'बीती ना बिताई रैना' को भी जोड़ा। संजीव कुमार के जीवन और करियर की झलकियों के साथ, यह लेख उनके योगदान को याद करता है। जानें उनके यादगार किरदारों और फिल्मों के बारे में।
 

जैकी श्रॉफ का संजीव कुमार को याद करने का खास अंदाज

मुंबई, 6 नवंबर। बॉलीवुड के मशहूर अभिनेता जैकी श्रॉफ अपनी सरलता और पुराने कलाकारों के प्रति सम्मान के लिए जाने जाते हैं। वह अक्सर सोशल मीडिया पर फिल्म इंडस्ट्री से जुड़ी पुरानी यादें और दिग्गज कलाकारों की तस्वीरें साझा करते हैं। हाल ही में, उन्होंने हिंदी सिनेमा के महान अभिनेता संजीव कुमार को उनकी पुण्यतिथि पर याद किया और एक विशेष पोस्ट के माध्यम से उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की।


जैकी श्रॉफ ने संजीव कुमार की एक ब्लैक एंड व्हाइट तस्वीर साझा की और उनके प्रति अपने प्रेम का इजहार किया। उन्होंने तस्वीर के साथ लिखा, 'हमेशा हमारे दिलों में रहेंगे।'


इस पोस्ट में जैकी ने 1972 में रिलीज हुई फिल्म 'परिचय' का प्रसिद्ध गाना 'बीती ना बिताई रैना' भी जोड़ा, जिसे लता मंगेशकर और भूपिंदर सिंह ने गाया था। इस गाने में संजीव कुमार और जया बच्चन की जोड़ी नजर आई थी।


संजीव कुमार का जन्म 9 जुलाई 1938 को गुजरात के सूरत में हरिभाई जरीवाला के नाम से हुआ था। उन्होंने अपने समय के अन्य बड़े अभिनेताओं से अलग रोमांटिक हीरो, कॉमेडी किरदार, पिता और वृद्ध व्यक्तियों की भूमिकाएं भी बखूबी निभाईं।


फिल्म 'खिलौना' से संजीव कुमार को पहचान मिली, जिसके बाद उन्होंने कई ऐसी फिल्मों में काम किया, जिनमें उनके अभिनय की सराहना हुई। उन्हें फिल्म 'दस्तक' और 'कोशिश' के लिए राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार भी मिले। 'कोशिश' में उन्होंने एक ऐसे व्यक्ति का किरदार निभाया था, जो सुन और बोल नहीं सकता था।


संजीव कुमार ने अपने करियर में कई यादगार फिल्मों में काम किया, जिनमें 'शोले' भी शामिल है, जहां उन्होंने ठाकुर बलदेव सिंह का आइकॉनिक किरदार निभाया। इसके अलावा, 'अंगूर', 'आंधी', 'मौसम', 'त्रिशूल', 'सीता और गीता', 'नमकीन', 'अनामिका', 'पति पत्नी और वो' जैसी फिल्मों में उनके अभिनय को काफी सराहा गया।


फिल्म 'नया दिन नई रात' में उन्होंने एक साथ नौ अलग-अलग किरदार निभाए थे, जिसमें उनके अभिनय के विभिन्न रंग देखने को मिले।


संजीव कुमार के निधन के बाद भी उनकी कई फिल्में रिलीज हुईं, जिनमें 'लव एंड गॉड', 'हाथों की लकीरें', 'कत्ल', 'बात बन जाए', 'नामुमकिन' और 'प्रोफेसर की पड़ोसन' शामिल हैं। उनकी अंतिम फिल्म 'प्रोफेसर की पड़ोसन' 1993 में रिलीज हुई थी।


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