गैरी संधू: कैसे एक साधारण लड़के ने संगीत की दुनिया में बनाई पहचान?
गैरी संधू का अद्भुत सफर
मुंबई, 03 अप्रैल (वेब वार्ता)। यह कहा जाता है कि किस्मत से बड़ा कुछ नहीं होता। जो कुछ भी किस्मत में लिखा होता है, वह अवश्य मिलता है और किस्मत अपने अनुसार रास्ते भी खोलती है। पंजाबी गायक गैरी संधू के साथ भी कुछ ऐसा ही हुआ।
गैरी संधू ने कभी भी गायक बनने का सपना नहीं देखा था। वह अपने घर में अन्य गायकों के गाने सुनते थे, जिससे उनका संगीत के प्रति रुझान बढ़ा। आज, वह एक ग्लोबल सिंगर बनकर अपने प्रशंसकों के दिलों पर राज कर रहे हैं। 4 अप्रैल को, वह अपना 42वां जन्मदिन मनाएंगे।
जालंधर के रुरका कलां गांव से ताल्लुक रखने वाले गैरी संधू पढ़ाई में कमजोर थे और उनके पिता एक ड्राइवर थे। परिवार की आर्थिक स्थिति ठीक नहीं थी, जिससे उन्हें कई परेशानियों का सामना करना पड़ा। इन कठिनाइयों को देखते हुए गैरी ने गायन में करियर बनाने का निर्णय लिया।
गैरी ने घर में रेडियो पर गाने सुने और कई धार्मिक स्थलों पर गाना गाया। उन्होंने कविश्री शैली सीखी और 13 साल की उम्र में गुरदीप सिंह से पंजाब के लोकगीतों का ज्ञान प्राप्त किया। बेहतर भविष्य की तलाश में, वह इंग्लैंड चले गए। 10वीं कक्षा के बाद, उन्होंने पढ़ाई छोड़कर काम करने का निर्णय लिया।
इंग्लैंड में, गैरी ने जीवन यापन के लिए विभिन्न काम किए और 2010 में अपना पहला गाना 'मैं नी पींदा' रिलीज किया। इस गाने ने पंजाबी वाइब और भांगड़ा स्टाइल के साथ फैंस को आकर्षित किया। हालांकि, 2011 में उन्हें भारत वापस भेज दिया गया। गैरी पर यूके में अवैध रूप से रहने का आरोप लगा था।
भारत लौटना उनके लिए एक बड़ा झटका था, क्योंकि उन पर 8 साल का बैन भी लगा था। भारत में रहकर वह डिप्रेशन का सामना कर रहे थे, लेकिन उनकी मां ने उन्हें हिम्मत दी। 2017 में, गैरी का 'इलीगल वेपन' और 'बेबी' हिट हुआ। इसके बाद, उन्हें फिल्मों में गाने के ऑफर मिलने लगे। उन्होंने 'दे दे प्यार दे' के लिए 'हौली हौली' और 'स्ट्रीट डांसर 3D' में कई गाने गाए।
.png)