गुड़ी पड़वा: भारतीय परंपराओं का जश्न और नई शुरुआत का प्रतीक
गुड़ी पड़वा पर इंदिरा कृष्णन और शरद केलकर के विचार
नई दिल्ली, 19 मार्च। भारत में हर त्योहार एक विशेष संदेश लेकर आता है, जो हमें जीवन में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करता है। गुड़ी पड़वा जैसे पर्व को नई शुरुआत, आशा और सकारात्मकता का प्रतीक माना जाता है। इस अवसर पर, इंदिरा कृष्णन और शरद केलकर ने अपने विचार साझा किए। दोनों कलाकारों ने परंपराओं की महत्ता, नई शुरुआत और जीवन में आगे बढ़ने की सोच पर जोर दिया।
टीवी शो 'गंगा माई की बेटियां' में दुर्गावती का किरदार निभाने वाली इंदिरा कृष्णन ने कहा, "भारतीय परंपराओं में हर त्योहार का गहरा अर्थ होता है। गुड़ी पड़वा पर घर के बाहर लगाई जाने वाली 'गुड़ी' शक्ति, साहस और सकारात्मकता का प्रतीक है, जो हमें याद दिलाती है कि हर कठिनाई के बाद एक नई शुरुआत संभव है।"
उन्होंने आगे कहा, ''यह त्योहार मेरे जीवन की यात्रा को समझने का अवसर देता है, जहां हर चुनौती ने मुझे और मजबूत बनाया है। यह दिन आत्मविश्वास, विश्वास और कृतज्ञता का प्रतीक है। हमें अपने अनुभवों से सीखते हुए हर नए दिन को एक नए अवसर की तरह अपनाना चाहिए।''
इस खास मौके पर, उन्होंने सभी के लिए शांति, समृद्धि और खुशहाली की कामना की और कहा कि गुड़ी पड़वा हमें सिखाता है कि हमें हर हाल में उम्मीद बनाए रखनी चाहिए।
वहीं, टीवी शो 'तुम से तुम तक' में नजर आ रहे शरद केलकर ने भी गुड़ी पड़वा के बारे में अपने विचार साझा किए। उन्होंने कहा, ''मेरे लिए गुड़ी पड़वा केवल एक पारंपरिक पर्व नहीं है, बल्कि यह नई शुरुआत, उम्मीद और आत्मविश्वास का प्रतीक है। मैं हर साल इस त्योहार को मनाने का समय निकालता हूं, क्योंकि यह मुझे अपने परिवार और जड़ों से जोड़ता है।''
शरद ने कहा, ''आज की तेज़-तर्रार जिंदगी में लोग अपनी संस्कृति से दूर होते जा रहे हैं, लेकिन ऐसे त्योहार हमें एक बार फिर अपने करीब लाते हैं। गुड़ी पड़वा हमें सिखाता है कि हमें हर नई शुरुआत को सकारात्मक सोच और दृढ़ निश्चय के साथ अपनाना चाहिए।''
उन्होंने यह भी कहा कि इन मूल्यों और परंपराओं को अगली पीढ़ी तक पहुंचाना आवश्यक है, ताकि वे अपनी संस्कृति को समझ सकें। उनके लिए यह त्योहार न केवल खुशियों का अवसर है, बल्कि जीवन में स्थिरता बनाए रखने का एक साधन भी है।
'गंगा माई की बेटियां' और 'तुम से तुम तक' शो जी टीवी पर प्रसारित होते हैं।
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