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क्या है सोनू सूद की मां कामाख्या देवी मंदिर यात्रा का रहस्य? जानें इस आध्यात्मिक सफर के बारे में!

अभिनेता सोनू सूद ने हाल ही में असम के गुवाहाटी में मां कामाख्या देवी मंदिर का दौरा किया। उन्होंने अपनी यात्रा की झलक सोशल मीडिया पर साझा की, जिसमें उन्होंने विधिपूर्वक पूजा-अर्चना की। मंदिर प्रबंधन और प्रशंसकों ने उनका स्वागत किया। जानें इस प्रसिद्ध शक्तिपीठ की विशेषताएँ और सोनू सूद की आध्यात्मिक यात्रा के बारे में।
 
क्या है सोनू सूद की मां कामाख्या देवी मंदिर यात्रा का रहस्य? जानें इस आध्यात्मिक सफर के बारे में!

सोनू सूद की आध्यात्मिक यात्रा


मुंबई, 20 मई। अभिनेता सोनू सूद हाल ही में असम के गुवाहाटी में स्थित मां कामाख्या देवी के प्रसिद्ध मंदिर में दर्शन करने पहुंचे। उन्होंने इस आध्यात्मिक यात्रा की झलक अपने सोशल मीडिया पर साझा की।


इंस्टाग्राम पर साझा किए गए वीडियो में, सोनू सूद ने आम यात्रियों की तरह ट्रेन से सफर करते हुए मां कामाख्या देवी मंदिर का दौरा किया। वहां पहुंचकर, उन्होंने विधिपूर्वक पूजा-अर्चना की और मंदिर परिसर में काफी समय बिताया।


मंदिर में अभिनेता को देखकर वहां के प्रबंधन और प्रशंसक काफी उत्साहित थे। फैंस ने उनके साथ तस्वीरें खिंचवाईं, जबकि मंदिर प्रबंधन समिति ने उनका पारंपरिक तरीके से भव्य स्वागत किया। समिति के सदस्यों ने उन्हें अंगवस्त्र और माता का प्रतीक चिह्न भेंट कर सम्मानित किया।


वीडियो में सोनू सूद कहते हैं, "नमस्कार दोस्तों, आज हम जा रहे हैं मां कामाख्या देवी मंदिर। वहां पर हम माता रानी के दर्शन करेंगे।"


अभिनेता ने वीडियो के साथ लिखा, "जय मां कामाख्या देवी।"


सोशल मीडिया पर फैंस सोनू सूद की इस धार्मिक यात्रा की प्रशंसा कर रहे हैं।


कामाख्या देवी मंदिर, जो नीलांचल पहाड़ी पर स्थित है, देश के 51 शक्तिपीठों में से एक महत्वपूर्ण स्थल है। यह धार्मिक आस्था, तंत्र साधना और देवी उपासना के लिए विश्वभर में प्रसिद्ध है। मान्यता है कि यहां माता सती का 'योनि' भाग गिरा था, इसलिए इसे शक्ति साधना का एक प्रमुख केंद्र माना जाता है।


मुख्य मंदिर में देवी की कोई मूर्ति या तस्वीर नहीं है। यहां एक प्राकृतिक दरार है, जिसमें निरंतर जल प्रवाहित होता रहता है और इसे फूलों से ढका जाता है। हर साल जून में मंदिर लगभग तीन दिनों के लिए बंद रहता है, क्योंकि इस अवधि में माता रजस्वला होती हैं। चौथे दिन मंदिर के कपाट श्रद्धालुओं के लिए खोल दिए जाते हैं।


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