क्या है श्रेया घोषाल का संगीत के बदलते दौर पर नजरिया?
श्रेया घोषाल का संगीत उद्योग पर विचार
मुंबई, 10 मई। वर्तमान म्यूजिक इंडस्ट्री तेजी से विकसित हो रहे डिजिटल युग में प्रवेश कर चुकी है। इस बदलाव के साथ-साथ कलाकारों के लिए नए अवसरों के साथ मानसिक दबाव भी बढ़ गया है। इस संदर्भ में, पांच बार नेशनल अवॉर्ड विजेता प्लेबैक सिंगर श्रेया घोषाल ने अपने विचार साझा किए।
उन्होंने बताया कि आज के समय में संगीत बनाना एक चुनौती बन गया है, जहां कलाकारों को निरंतर अपनी प्रतिभा साबित करनी होती है।
श्रेया ने कहा, ''आजकल फॉलोअर्स, व्यूज, स्ट्रीमिंग आंकड़े और सोशल मीडिया एल्गोरिदम जैसे तत्व कलाकारों का ध्यान कई दिशाओं में बांट देते हैं। जब कोई कलाकार इन आंकड़ों के बारे में अधिक सोचने लगता है, तो वह अपने असली उद्देश्य से भटक सकता है। इस डिजिटल युग में असली चुनौती अपने फोकस को बनाए रखना है।''
उन्होंने आगे कहा, ''मैं खुद को भाग्यशाली मानती हूं, क्योंकि जब मैंने अपने करियर की शुरुआत की थी, तब ऐसा डिजिटल दबाव नहीं था। उस समय संगीत का आधार केवल श्रोता और कलाकार के बीच का भावनात्मक संबंध था। लोग गाने को उसके सुर, शब्द और भावना के आधार पर पसंद करते थे, न कि व्यूज या लाइक्स के आधार पर। उस समय संगीत की असली आत्मा में उसका महत्व था और कलाकार उसी जुड़ाव के जरिए आगे बढ़ते थे।''
श्रेया ने कहा, ''आज के समय में प्लेटफॉर्म्स ने कलाकारों को एक बड़ा मंच प्रदान किया है। अब कोई भी गायक या संगीतकार आसानी से वैश्विक श्रोताओं तक पहुंच सकता है। यह एक बड़ी उपलब्धि है, लेकिन इसके साथ यह जिम्मेदारी भी आती है कि कलाकार लगातार नया और बेहतर काम करे। आज के समय में खुद को अपडेट रखना और दर्शकों से जुड़े रहना बेहद आवश्यक हो गया है।''
युवा कलाकारों की सराहना करते हुए उन्होंने कहा, ''आज की पीढ़ी बहुत मेहनती और रचनात्मक है। वे किसी की नकल करने के बजाय अपनी पहचान बनाने की कोशिश कर रहे हैं। यह एक सकारात्मक बदलाव है। आज के युवा कलाकार अपने आसपास के माहौल, शिक्षकों और पुराने महान कलाकारों से प्रेरणा लेते हैं, लेकिन उसे अपने तरीके से ढालते हैं।''
उन्होंने बातचीत में कहा, ''सीखने की प्रक्रिया कलाकार के जीवन में कभी समाप्त नहीं होती। चाहे कोई कलाकार कितना भी अनुभवी क्यों न हो, हर दिन कुछ नया सीखने को मिलता है। मैं भी हर मुलाकात और अनुभव से कुछ न कुछ सीखती रहती हूं।''
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