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क्या बदल गई हैं फिल्मों में महिलाओं की छवि? मधु ने उठाया अहम सवाल

मधु ने हाल ही में एक इंटरव्यू में फिल्मों में महिलाओं की छवि और समाज के बदलते नजरिए पर अपने विचार साझा किए। उन्होंने बताया कि कैसे 90 के दशक में जो चीजें सामान्य मानी जाती थीं, आज उन्हें गलत समझा जाता है। मधु ने यह भी कहा कि सिनेमा हमेशा समाज का आईना होता है और जैसे-जैसे समाज की सोच बदलती है, वैसे-वैसे फिल्मों की कहानियां भी बदलती हैं। जानें उनके विचारों का क्या मतलब है और कैसे आज का दर्शक पहले से ज्यादा जागरूक हो गया है।
 
क्या बदल गई हैं फिल्मों में महिलाओं की छवि? मधु ने उठाया अहम सवाल

फिल्मों में महिलाओं की भूमिका पर मधु का विचार




मुंबई, 11 जून। सिनेमा में महिलाओं की प्रस्तुति का मुद्दा एक बार फिर चर्चा का विषय बन गया है। हाल ही में अभिनेता राम चरण की फिल्म 'पेड्डी' में जान्हवी कपूर के किरदार को लेकर सोशल मीडिया पर बहस छिड़ गई।


इस संदर्भ में, 90 के दशक की मशहूर अभिनेत्री मधु ने फिल्मों में महिलाओं की छवि और समय के साथ बदलाव पर अपने विचार साझा किए। एक इंटरव्यू में उन्होंने कहा कि सिनेमा हमेशा समाज का प्रतिबिंब होता है और जैसे-जैसे समाज बदलता है, फिल्मों को भी उसी के अनुसार विकसित होना पड़ता है।


मधु ने कहा, "आज जो चीजें गलत मानी जाती हैं, वे पहले सामान्य और रोमांटिक समझी जाती थीं। मेरी हिट फिल्म 'फूल और कांटे' में जो दिखाया गया, उसे उस समय प्यार माना गया, लेकिन आज वही व्यवहार छेड़छाड़ के रूप में देखा जाएगा।"


जब उनसे पूछा गया कि क्या आज की फिल्मों में महिलाओं को केवल वस्तु के रूप में दिखाया जाता है, तो उन्होंने कहा, "यह केवल फिल्मों का नहीं, बल्कि समाज की सोच का भी मामला है। फिल्में उसी तरह बदलती हैं जैसे लोगों की सोच। अगर समाज किसी चीज को स्वीकार नहीं करता, तो वह धीरे-धीरे फिल्मों से गायब हो जाती है।"


मधु ने आगे कहा, "80 और 90 के दशक की फिल्मों में बलात्कार के दृश्य सामान्य थे। उस समय इन पर ज्यादा सवाल नहीं उठाए जाते थे। लेकिन अब समय बदल चुका है और ऐसे दृश्यों को पहले की तरह स्वीकार नहीं किया जाता।"


उन्होंने कहा, "आज अगर किसी फिल्म में ऐसी घटनाएं दिखाई जाती हैं, तो उन्हें बहुत सावधानी से पेश किया जाता है। फिल्मकार अब इस बात का ध्यान रखते हैं कि गंभीर विषयों को दिखाते समय गलत संदेश न जाए।"


मधु ने अपनी फिल्म 'फूल और कांटे' का उदाहरण देते हुए कहा, "फिल्म के शुरुआती गानों में हीरो और उसके दोस्त कॉलेज में लड़की का पीछा करते हैं। उस समय इसे रोमांस का हिस्सा माना गया, लेकिन आज ऐसा करने वाला लड़का जेल में होगा।"


उन्होंने कहा, "फिल्म में मेरा किरदार अंततः उसी लड़के से प्यार कर लेता है, जो उसे परेशान करता है। उस समय इसे प्रेम कहानी माना गया, लेकिन आज ऐसा व्यवहार गलत माना जाएगा।"


मधु ने कहा, "उस समय किसी ने नहीं कहा कि फिल्म छेड़छाड़ को बढ़ावा दे रही है। दर्शकों ने इसे पसंद किया और यह बड़ी हिट बन गई। लेकिन आज का दर्शक अधिक जागरूक है और ऐसे मुद्दों पर सवाल उठाता है।"


उन्होंने अंत में कहा, "सिनेमा हमेशा समाज की सोच को दर्शाता है। जैसे-जैसे समाज बदलता है, वैसे-वैसे फिल्मों की कहानियां और किरदार भी बदलते हैं। आज महिलाओं के सम्मान और अधिकारों के प्रति जागरूकता बढ़ी है, इसलिए फिल्मों को भी इसी सोच के साथ आगे बढ़ना होगा।"


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