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क्या गलगोटिया यूनिवर्सिटी का रोबोटिक कुत्ता विवाद भारतीय शिक्षा प्रणाली की कमजोरी को उजागर करता है?

फिल्म निर्माता विवेक रंजन अग्निहोत्री ने गलगोटिया यूनिवर्सिटी के रोबोटिक कुत्ते विवाद पर अपनी चिंताएं व्यक्त की हैं। उन्होंने इसे भारतीय शिक्षा प्रणाली की कमजोरियों का प्रतीक बताया है। इस विवाद ने तकनीकी नवाचार और शिक्षा के प्रति हमारी सोच पर सवाल उठाए हैं। विवेक ने सुझाव दिया कि विश्वविद्यालयों को राजनीति से अलग रखना और शैक्षणिक स्वायत्तता को सुरक्षित करना आवश्यक है। क्या भारत इस दिशा में कदम उठाएगा? जानें पूरी कहानी में।
 
क्या गलगोटिया यूनिवर्सिटी का रोबोटिक कुत्ता विवाद भारतीय शिक्षा प्रणाली की कमजोरी को उजागर करता है?

विवेक अग्निहोत्री का विवाद पर विचार




नई दिल्ली, 24 फरवरी। फिल्म निर्माता विवेक रंजन अग्निहोत्री ने गलगोटिया यूनिवर्सिटी में हुए रोबोटिक कुत्ते के विवाद पर अपनी राय साझा की है। उन्होंने इसे केवल एक घटना नहीं, बल्कि भारतीय शिक्षा और नवाचार प्रणाली की कमियों का प्रतीक बताया।


यह विवाद हाल ही में दिल्ली में आयोजित इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट से शुरू हुआ, जहां गलगोटिया यूनिवर्सिटी के पवेलियन में एक चार पैरों वाला रोबोटिक कुत्ता प्रदर्शित किया गया। इसे 'सेंटर ऑफ एक्सीलेंस' और 'एआई लीडरशिप' के रूप में पेश किया गया, लेकिन बाद में पता चला कि यह एक चीनी कंपनी यूनिट्री रोबोटिक्स का उत्पाद था, जिसे विश्वविद्यालय ने विकसित नहीं किया था। विवाद बढ़ने पर स्टॉल को खाली करवाया गया और माफी मांगी गई।


अग्निहोत्री ने कहा कि यह मामला रोबोट के बारे में नहीं, बल्कि हमारी सोच के बारे में है। उन्होंने यह भी कहा कि तकनीक का आयात करना गलत नहीं है, लेकिन इसे अपनी खोज के रूप में प्रस्तुत करना एक चिंता का विषय है। यह एक ऐसे सिस्टम की पहचान है जो मौलिक अनुसंधान की बजाय दिखावे को प्राथमिकता देता है।


उन्होंने भारतीय शिक्षा प्रणाली पर सवाल उठाते हुए कहा कि प्राइवेट यूनिवर्सिटीज अक्सर राजनीतिक और व्यावसायिक हितों से प्रभावित होती हैं। यहां शिक्षा को राजस्व का स्रोत बना दिया गया है, जबकि अनुसंधान को नजरअंदाज किया जा रहा है। एआई जैसी तकनीक को केवल एक फेस्टिवल थीम के रूप में देखा जा रहा है, जबकि यह समाज को बदलने की क्षमता रखती है।


विवेक ने प्राचीन भारत के विश्वविद्यालयों जैसे नालंदा और तक्षशिला का उदाहरण देते हुए बताया कि वे छात्रों को आकर्षित करते थे और वहां विचार-विमर्श को बढ़ावा दिया जाता था। आज हम विश्वसनीयता और बौद्धिक ईमानदारी को खो रहे हैं। अमेरिका और चीन इस क्षेत्र में काफी आगे हैं, जबकि भारत अभी भी बुनियादी ढांचे पर चर्चा कर रहा है।


उन्होंने सवाल किया कि आज का 'खिलजी' कौन है? क्या यह विदेशी आक्रमणकारी हैं या वह प्रणाली जो सवाल पूछने के बजाय तमाशा पसंद करती है? अगर भारत केवल प्रदर्शन पर ध्यान देता रहा, तो हम दूसरों की बुद्धिमत्ता के उपभोक्ता बन जाएंगे। विवेक ने सुझाव दिया कि भारतीय विश्वविद्यालयों को राजनीति से अलग रखना और शैक्षणिक स्वायत्तता को कानूनी रूप से सुरक्षित करना आवश्यक है। एआई का उपयोग विभिन्न क्षेत्रों में करना भी जरूरी है। उन्होंने कहा कि भले ही पहली बस छूट गई हो, लेकिन अगला पड़ाव अभी बाकी है। इसके लिए वास्तविक कार्रवाई की आवश्यकता है।


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