क्या आप जानते हैं 'फुल्लू' फिल्म के 9 साल पूरे होने पर शारिब हाशमी ने क्या कहा?
शारिब हाशमी ने साझा की 'फुल्लू' की अनदेखी तस्वीरें
मुंबई, 16 जून। अभिनेता शारिब हाशमी ने अपनी फिल्म 'फुल्लू' के 9 साल पूरे होने के अवसर पर सोशल मीडिया पर एक विशेष पोस्ट साझा की है। इस पोस्ट में उन्होंने फिल्म से जुड़ी कुछ अनदेखी तस्वीरें साझा की हैं, जिनमें विभिन्न सीन्स और शूटिंग के पल शामिल हैं। इसके साथ ही, उन्होंने फिल्म के सामाजिक संदेश को फिर से उजागर किया।
इंस्टाग्राम पर साझा की गई तस्वीरों में गांव की झलक और सेट पर बिताए गए कलाकारों के साथ खास पल दिखाई दे रहे हैं। उन्होंने कैप्शन में लिखा, "'फुल्लू' को 9 साल हो गए हैं। यह पहली हिंदी फिल्म थी जिसने पीरियड्स और उससे जुड़ी सामाजिक झिझक को तोड़ने की कोशिश की। ऐसी पहली पहल का हिस्सा बनना मेरे लिए गर्व की बात है और यह अनुभव मेरे करियर में हमेशा खास रहेगा।"
फिल्म 'फुल्लू' का निर्देशन अभिषेक सक्सेना ने किया था। यह फिल्म गांव की पृष्ठभूमि में एक गंभीर सामाजिक मुद्दे को दर्शाती है। फिल्म में शारिब हाशमी के साथ अभिनेत्री ज्योति सेठी मुख्य भूमिका में हैं।
कहानी एक साधारण ग्रामीण व्यक्ति फुल्लू (शारिब हाशमी) के इर्द-गिर्द घूमती है, जो अपनी मासूमियत के लिए जाना जाता है। वह गांव में महिलाओं के बीच लोकप्रिय है, क्योंकि वह शहर जाकर उनके लिए जरूरी सामान लाने का काम करता है। गांव में उसके इस स्वभाव के कारण लोग उसका मजाक बनाते हैं, लेकिन वह अपनी मदद करने की प्रवृत्ति से पीछे नहीं हटता। उसकी मां उसे अक्सर डांटती है और जिम्मेदार बनने की सलाह देती है, लेकिन फुल्लू की जिंदगी उसी सरलता में चलती रहती है।
कहानी में मोड़ तब आता है जब फुल्लू को शहर में पीरियड्स से जुड़ी स्वच्छता के बारे में जानकारी मिलती है। उसे पता चलता है कि गांव की महिलाएं पुराने कपड़ों का इस्तेमाल करती हैं, जिससे उनके स्वास्थ्य पर बुरा असर पड़ता है। इस जानकारी के बाद फुल्लू का जीवन बदल जाता है और वह तय करता है कि वह सैनिटरी पैड बनाने की प्रक्रिया सीखेगा और गांव की महिलाओं के लिए इसे उपलब्ध कराने की कोशिश करेगा। वह शहर जाकर फैक्ट्री में काम करता है और वहां से सीखकर गांव लौटता है।
गांव लौटने के बाद उसे कई चुनौतियों का सामना करना पड़ता है। लोग उसकी बातों पर विश्वास नहीं करते और कई बार उसका मजाक भी उड़ाया जाता है। हालांकि, फुल्लू पीछे नहीं हटता और लगातार महिलाओं को जागरूक करने की कोशिश करता रहता है।
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