क्या आप जानते हैं नरगिस दत्त और सुनील दत्त की अनोखी प्रेम कहानी? जानें उनकी यादगार लम्हें!
नरगिस दत्त की पुण्यतिथि: एक अद्भुत अभिनेत्री की कहानी
नई दिल्ली, 3 मई। आज भारतीय सिनेमा की एक महान अभिनेत्री नरगिस दत्त की पुण्यतिथि है। उन्होंने 3 मई 1981 को केवल 51 वर्ष की आयु में इस दुनिया को अलविदा कहा। उनका जीवन रोमांच, संघर्ष और प्रेम से भरा हुआ था, लेकिन एक दिलचस्प घटना आज भी चर्चा का विषय है। जब उन्होंने अपने सामने खड़े सुनील दत्त को पहचानने में असफल रहीं।
फिल्म ‘हमराज’ की शूटिंग के दौरान नरगिस ने सुनील दत्त को पहचान नहीं पाई और अपने मेकअप आर्टिस्ट को अपनी कीमती घड़ी भेंट कर दी। नरगिस का असली नाम रशीद फातिमा था, और उनका जन्म 1 जून 1929 को कोलकाता में हुआ। अभिनय की दुनिया में कदम रखने के बाद, उन्हें महबूब खान की फिल्म ‘मदर इंडिया’ से पहचान मिली। इस फिल्म के दौरान सुनील दत्त ने आग के दृश्य में उनकी जान बचाई, जिसके बाद दोनों के बीच प्रेम बढ़ा और उन्होंने 11 मार्च 1958 को शादी कर ली।
शादी के बाद नरगिस और सुनील दत्त का साथ फिल्मी और पारिवारिक जीवन में भी बना रहा। उनके तीन बच्चे हुए: संजय दत्त, नम्रता, और प्रिया। हालांकि, दोनों ने एक साथ ज्यादा फिल्में नहीं कीं, लेकिन 1964 में आई फिल्म ‘यादें’ में उन्होंने साथ काम किया।
सुनील दत्त और नरगिस से जुड़ा एक मजेदार किस्सा है। फिल्म ‘हमराज’ की शूटिंग के दौरान, सुनील दत्त को एक 110 वर्षीय बूढ़े का किरदार निभाना था। मेकअप आर्टिस्ट पंडरी सुकर ने उनका ऐसा मेकअप किया कि वे पूरी तरह से बूढ़े लग रहे थे। जब नरगिस सेट पर आईं, तो उन्होंने चारों ओर देखा और स्टाफ से पूछा, “दत्त साहब कहां हैं?” सुनील दत्त वहीं खड़े थे, लेकिन नरगिस उन्हें पहचान नहीं पाईं। उन्होंने बूढ़े बाबा से भी पूछा कि दत्त साहब कहां हैं, जिस पर बूढ़े बाबा ने मजाक में कहा कि वे तो आए ही नहीं हैं।
नरगिस ने सेट पर काफी देर तक सुनील दत्त का इंतजार किया। लगभग दो घंटे बाद, मेकअप आर्टिस्ट ने उन्हें बताया कि जिस बूढ़े बाबा से वह बात कर रही थीं, वही सुनील दत्त हैं। नरगिस इस अद्भुत मेकअप को देखकर दंग रह गईं और उन्होंने मेकअप आर्टिस्ट की सराहना करते हुए अपनी कीमती घड़ी उन्हें भेंट कर दी।
नरगिस न केवल एक बेहतरीन अभिनेत्री थीं, बल्कि एक समाजसेवी भी थीं। उन्हें पद्मश्री से सम्मानित किया गया और राज्यसभा की सदस्य भी चुनी गईं। ‘मदर इंडिया’ के लिए उन्हें फिल्मफेयर अवॉर्ड और ‘रात और दिन’ के लिए राष्ट्रीय पुरस्कार मिला। उन्होंने शादी के बाद फिल्मों से दूरी बना ली और परिवार व समाजसेवा में समय बिताया। 3 मई को पैंक्रियाटिक कैंसर ने उन्हें हमेशा के लिए हमसे छीन लिया। उनके निधन के बाद 1982 में नरगिस दत्त मेमोरियल कैंसर फाउंडेशन की स्थापना की गई, जो आज भी कैंसर पीड़ितों की सहायता कर रहा है.
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