कौन हैं मास्टर सलीम? जानें इस सूफी गायक की प्रेरणादायक यात्रा
मास्टर सलीम: एक अद्वितीय संगीत यात्रा
मुंबई, 12 जुलाई। भारतीय संगीत के इतिहास में कुछ ऐसे कलाकार हैं, जिन्होंने अपनी कला को व्यवसायिकता से ऊपर उठाकर एक आध्यात्मिक और रूहानी साधना का रूप दिया है। ऐसे ही एक प्रतिभाशाली गायक हैं सलीम शहजादा, जिन्हें दुनिया 'मास्टर सलीम' के नाम से जानती है। उनके पिता, प्रसिद्ध सूफी गायक उस्ताद पूरन शाह कोटी ने उन्हें केवल 6 साल की उम्र में शास्त्रीय और सूफियाना संगीत की शिक्षा देना शुरू किया।
लखनऊ में आयोजित सांस्कृतिक कार्यक्रम 'देशज' में मास्टर सलीम ने एक दिलचस्प घटना साझा की। उन्होंने बताया कि जब वह छोटे थे, एक मंच पर प्रस्तुति के दौरान उनका सुर भटक गया था, तब उनके पिता ने उन्हें दर्शकों के सामने टोक दिया। जब यह गलती फिर से हुई, तो उनके पिता ने चेतावनी दी कि 'सही गाओ, वरना परिणाम अच्छे नहीं होंगे।'
आज, जब मास्टर सलीम वैश्विक मंचों पर अपनी गायकी का लोहा मनवाते हैं, तो वह अपने पिता के कड़े अनुशासन को अपनी सफलता का श्रेय देते हैं।
13 जुलाई 1980 को पंजाब के जालंधर जिले के शाहकोट में जन्मे मास्टर सलीम का पालन-पोषण एक संगीत प्रेमी परिवार में हुआ। उनकी माता ने हमेशा कला के लिए अनुकूल वातावरण बनाए रखा, और उनके छोटे भाई परवेज ने भी गायकी को अपना पेशा बनाया।
सलीम की असाधारण प्रतिभा का पहला प्रमाण तब मिला जब उन्होंने 7 साल की उम्र में बठिंडा दूरदर्शन के उद्घाटन समारोह में 'चरखे दी घूक' नामक लोक गीत प्रस्तुत किया। इस प्रस्तुति ने उन्हें 'मास्टर' की उपाधि दिलाई। 10 साल की उम्र में, 1990 में, उनका पहला आधिकारिक संगीत एल्बम 'चरखे दी घूक' जारी हुआ, जिसने उन्हें एक राष्ट्रीय बाल कौतुक के रूप में स्थापित किया।
हालांकि, 1990 के दशक के अंत में, उनकी आवाज में बदलाव आया, जिससे उनके करियर में कठिनाई आई। लेकिन सलीम ने इस चुनौती को साधना का माध्यम बनाया।
वर्ष 2000 में, उन्होंने एक नववर्ष विशेष कार्यक्रम में सूफी गीत 'अज होना दीदार माही दा' के साथ वापसी की। इसके बाद, उन्होंने कई भक्ति एल्बम जारी किए, जिसने उनके करियर को नई दिशा दी।
मास्टर सलीम का बॉलीवुड में प्रवेश तब हुआ जब उन्होंने जालंधर के देवी तालाब मंदिर में भक्ति गीत गाया, जिसे शंकर महादेवन ने देखा और उन्हें फिल्म 'हे बेबी' के लिए बुलाया। इसके बाद, उन्होंने कई हिट गाने दिए।
उन्हें 2008 में 'मां दा लाडला' और 2009 में 'आहुं आहुं' से बड़ी सफलता मिली। 2014 में उन्होंने अनमोल अलीशा सलीम से विवाह किया और 2021 में 'वॉयस ऑफ पंजाब सीजन 12' में मुख्य निर्णायक बने।
आज, मास्टर सलीम संगीत की दुनिया में सक्रिय हैं और अपने नए गानों और लाइव कॉन्सर्ट के माध्यम से दर्शकों का मनोरंजन कर रहे हैं।
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