कौन हैं ममता शंकर? जानें नृत्य और सिनेमा की इस दिग्गज की कहानी
ममता शंकर: कला की विरासत की धरोहर
नई दिल्ली, 6 जनवरी। एक ऐसी अदाकारा, जिन्होंने न केवल कला की परंपरा को अपनाया बल्कि उसे आगे बढ़ाने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। घुंघरुओं की आवाज और संगीत के बीच पली-बढ़ी, उन्होंने अपने माता-पिता से नृत्य की बारीकियों को सीखा और एक सफल नृत्यांगना के साथ-साथ फिल्म अभिनेत्री के रूप में भी अपनी पहचान बनाई। यह कहानी है ममता शंकर की, जो बंगाली सिनेमा में अपने सशक्त अभिनय और शास्त्रीय नृत्य के लिए जानी जाती हैं।
ममता शंकर का जन्म 7 जनवरी 1955 को कोलकाता में हुआ। उनके जीवन में संगीत और नृत्य का गहरा प्रभाव था, क्योंकि वह पंडित रविशंकर, उदय शंकर, अमला शंकर और आनंद शंकर जैसे महान कलाकारों के परिवार से ताल्लुक रखती हैं। ममता, महान नृत्यांगना अमला शंकर और विश्वविख्यात नृत्यकार उदय शंकर की संतान हैं। उनके लिए कला केवल साधना नहीं, बल्कि जीवन का एक अभिन्न हिस्सा बन गई।
उन्होंने अपने माता-पिता के मार्गदर्शन में कोलकाता के उदय शंकर इंडिया कल्चर सेंटर से नृत्य की सभी विधाओं में दक्षता हासिल की। इसके बाद उन्होंने ज्ञान प्रकाशम से भरतनाट्यम, तरुण सिंह से मणिपुरी, राघवन से कथकली और राजेन बोस से कथक में महारत प्राप्त की। ममता ने एक बार कहा था, "गुणी और प्रसिद्ध कलाकारों के बीच खुद को पाकर मुझे गर्व महसूस होता है।"
नृत्य के क्षेत्र में अपने करियर की शुरुआत करते हुए, ममता शंकर ने बंगाली सिनेमा में अपनी एक अलग पहचान बनाई। उन्होंने मृणाल सेन की फिल्म 'मृगया' (1976) में मिथुन चक्रवर्ती के साथ अपने करियर की शुरुआत की। इसके बाद उन्होंने 'दूरत्व' (1978), 'एक दिन प्रतिदिन' (1979), 'गणशत्रु' (1990), 'आगंतुक' (1991) और 'दहन' (1997) जैसी कई चर्चित फिल्मों में अभिनय किया। मृणाल सेन के अलावा, उन्होंने सत्यजीत रे, रितुपर्णो घोष, बुद्धदेव दासगुप्ता और गौतम घोष जैसे कई प्रमुख फिल्म निर्माताओं के साथ भी काम किया।
अभिनय के साथ-साथ, ममता शंकर एक कुशल कोरियोग्राफर भी हैं। उन्होंने अपनी नृत्य मंडली के साथ देश-विदेश में कई कार्यक्रम किए हैं।
कला के क्षेत्र में उनके योगदान के लिए ममता शंकर को कई पुरस्कार मिले हैं। उन्हें 2016 में पश्चिम बंगाल नृत्य, नाटक और दृश्य कला अकादमी द्वारा अकादमी पुरस्कार, 2019 में समसामयिक नृत्य के लिए संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार और 2022 में भारत-बांग्लादेश काउंसिल द्वारा 'बंग रत्न' सम्मान दिया गया। पिछले वर्ष उन्हें 'पद्मश्री' पुरस्कार से भी नवाजा गया।
आज भी ममता शंकर नृत्य और सिनेमा की दुनिया में सक्रिय हैं, अपनी पारिवारिक विरासत को नई ऊंचाइयों पर ले जा रही हैं। वर्तमान में, वह कोलकाता स्थित ममता शंकर डांस कंपनी की निदेशक हैं और नृत्य की नई पीढ़ी को प्रशिक्षित कर रही हैं।
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