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कौन हैं मन्ना डे? भारतीय संगीत के इस दिग्गज की कहानी जानें!

मन्ना डे, भारतीय संगीत के एक अद्वितीय गायक, का जन्म 1 मई 1919 को कोलकाता में हुआ। उन्होंने शास्त्रीय संगीत को फिल्मी संगीत में बखूबी ढाला और कई भाषाओं में गीत गाए। उनके योगदान को भारत सरकार ने पद्मश्री, पद्मभूषण और दादासाहेब फाल्के पुरस्कार से सम्मानित किया। जानें उनके जीवन की अनकही कहानियाँ और संगीत की दुनिया में उनकी यात्रा के बारे में।
 
कौन हैं मन्ना डे? भारतीय संगीत के इस दिग्गज की कहानी जानें!

भारतीय संगीत के महानायक मन्ना डे


मुंबई, 30 अप्रैल। भारतीय फिल्म उद्योग में कई अद्वितीय कलाकार हुए हैं, जिनकी कला आज भी लोगों के दिलों में बसी हुई है। मन्ना डे एक ऐसे ही अद्भुत गायक हैं, जिन्होंने शास्त्रीय संगीत को लोकप्रिय बनाने और फिल्मी संगीत में उसे बखूबी प्रस्तुत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।


मन्ना डे का जन्म 1 मई 1919 को कोलकाता में हुआ, और उनका असली नाम प्रबोध चंद्र डे था। संगीत की दुनिया में उन्होंने मन्ना डे के नाम से पहचान बनाई। उनके चाचा, प्रसिद्ध संगीतकार कृष्णचंद्र डे (केसी डे), का उन पर गहरा प्रभाव था। उन्होंने अपनी प्रारंभिक संगीत शिक्षा अपने चाचा और उस्ताद दाबिर खान से ली। स्कूल में मन्ना डे हमेशा संगीत के क्षेत्र में अव्‍वल रहे। उन्होंने इंदु बाबुर पाठशाला में अपनी प्रारंभिक शिक्षा प्राप्त की और बाद में कोलकाता के स्कॉटिश चर्च कॉलेजिएट स्कूल में पढ़ाई की। विद्यासागर कॉलेज से स्नातक की डिग्री हासिल करने के बाद, वह सांस्कृतिक कार्यक्रमों में सक्रिय रूप से भाग लेते थे।


स्कूल के दिनों में, मन्ना डे ने लगातार तीन वर्षों तक गायन प्रतियोगिताओं में प्रथम स्थान प्राप्त किया। 1942 में, वह अपने चाचा केसी डे के साथ मुंबई चले आए, जहां उन्होंने पहले उनके सहायक के रूप में काम किया और फिर महान संगीतकार सचिन देव बर्मन के सहायक बने। मुंबई में उनके संगीत करियर की शुरुआत कठिनाइयों से भरी रही, लेकिन उनकी मेहनत और प्रतिभा ने उन्हें सफलता दिलाई।


मन्ना डे ने स्वतंत्र संगीतकार के रूप में अपनी पहली फिल्म ‘महापूजा’ के लिए संगीत तैयार किया। इसके बाद उन्होंने ‘घर घर की बात’, ‘शिव कन्या’, ‘कमला’, ‘जय महादेव’, और ‘विश्वामित्र’ जैसी कई फिल्मों में संगीत दिया। फिल्म ‘तमाशा’ में उन्होंने खेमचंद प्रकाश और एस.के. पाल के साथ मिलकर संगीत तैयार किया। हालांकि, पार्श्व गायक के रूप में वह अधिक प्रसिद्ध हुए। उन्होंने 1942 में फिल्म ‘तमन्ना’ से पार्श्व गायन की शुरुआत की, और फिल्म ‘मशाल’ में सचिन देव बर्मन के लिए गाया उनका गीत “ऊपर गगन विशाल…” बेहद लोकप्रिय हुआ।


मन्ना डे ने उस्ताद अमान अली खान और उस्ताद अब्दुल रहमान खान से शास्त्रीय संगीत की बारीकियों को सीखा। वह शास्त्रीय रागों पर आधारित गीतों को सहजता से गाते थे। उन्होंने राज कपूर के लिए “ये रात भीगी भीगी, ये मस्ती बिदाएं”, बलराज साहनी के लिए “ऐ मेरी जोहरा जबीं” और “धरती कहे पुकार के” जैसे अमर गीत गाए। उन्होंने लता मंगेशकर, आशा भोसले, मोहम्मद रफी, किशोर कुमार और मुकेश जैसे महान गायकों के साथ कई यादगार युगल गीत गाए।


दिलचस्प बात यह है कि मन्ना डे ने हिंदी के अलावा बांग्ला, मराठी, गुजराती, पंजाबी, उड़िया और अन्य भाषाओं में भी गीत गाए। उन्होंने साहित्यकार हरिवंश राय बच्चन की कृति ‘मधुशाला’ को अपने स्वर में जीवंत किया। भारत सरकार ने उन्हें पद्मश्री, पद्मभूषण और दादासाहेब फाल्के पुरस्कार से सम्मानित किया।


मन्ना डे का निधन 24 अक्टूबर 2013 को हुआ।


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