कौन हैं अमित कुमार? किशोर कुमार के बेटे की अनकही कहानी
अमित कुमार का संगीत सफर
मुंबई, 2 जुलाई। यह कहानी 1975 की है, जब बंबई के एक छोटे से म्यूजिक रूम में 23 वर्षीय एक युवक घबराया हुआ खड़ा था। उसके सामने आरडी बर्मन (पंचम दा) बैठे थे, और उनके बगल में मन्ना डे और किशोर कुमार जैसे दिग्गज मौजूद थे। आरडी बर्मन के कहने पर उस युवक ने संकोच में एक गाना गाया। वह युवक और कोई नहीं, बल्कि किशोर कुमार का बड़ा बेटा अमित कुमार था।
अमित कुमार का जन्म 3 जुलाई 1952 को कलकत्ता में हुआ था, और उन्हें संगीत और अभिनय का विरासत में मिला था। उनके पिता किशोर कुमार और मां रूमा गुहा ठाकुरता, जो एक प्रसिद्ध बंगाली अभिनेत्री थीं, ने उन्हें इस क्षेत्र में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया। उनके परिवार में कई फिल्मी हस्तियों का संबंध है, जिसमें उनकी सौतेली माताएं मधुबाला, योगिता बाली और लीना चंदावरकर शामिल हैं, जबकि अभिनेत्री काजोल उनकी भतीजी हैं।
अमित का बचपन कोलकाता में बीता, जहां उन्होंने दुर्गा पूजा के उत्सवों में गाना शुरू किया। एक बार महान बंगाली अभिनेता उत्तम कुमार ने उनकी प्रतिभा की सराहना की। जब उनकी मां ने शिकायत की कि अमित केवल 'फिल्मी' गाने गाते हैं, तो किशोर कुमार उन्हें बंबई ले आए। बंबई आने से पहले, उन्होंने अपने पिता की निर्देशित फिल्म 'दूर गगन की छांव में' (1964) में अभिनय किया और 11 साल की उम्र में 'दूर का राही' (1971) के लिए अपना पहला गाना रिकॉर्ड किया।
1981 में आई फिल्म 'लव स्टोरी' के गाने "याद आ रही है" ने उन्हें एक रात में स्टार बना दिया। इस सफलता का सबसे बड़ा क्षण 1982 के फिल्मफेयर अवार्ड्स में आया, जब बेस्ट मेल प्लेबैक सिंगर की श्रेणी में पिता किशोर कुमार और बेटे अमित कुमार आमने-सामने थे। कड़े मुकाबले के बाद अमित कुमार को विजेता घोषित किया गया, और किशोर कुमार ने गर्व से अपने बेटे को गले लगाया। 1980 के दशक में, वे कुमार गौरव, अनिल कपूर और संजय दत्त जैसे युवा कलाकारों की पहचान बन गए।
अमित कुमार के प्रमुख गानों में 'बड़े अच्छे लगते हैं', 'तेरी याद आ रही है', 'एक दो तीन', 'रोज रोज आंखों तले', 'उठे सबके कदम', 'तू रूठा तो मैं मान जाऊंगा', 'तिरछी टोपीवाले', और 'टिप टिप टिप टिप बारिश' शामिल हैं।
किशोर कुमार का आकस्मिक निधन 13 अक्टूबर 1987 को फिल्म इंडस्ट्री के लिए एक बड़ा झटका था। इसके बाद, अमित कुमार ने अपने पिता की अधूरी फिल्म 'ममता की छांव में' (1989) का निर्देशन किया और उसे पूरा किया। 4 जनवरी 1994 को उनके मार्गदर्शक आरडी बर्मन का भी निधन हो गया। अमित ने 1990 के मध्य में प्लेबैक सिंगिंग छोड़ दी और अपनी संगीत कंपनी 'कुमार ब्रदर्स म्यूजिक' की स्थापना की, जिससे उन्होंने स्वतंत्र संगीत और विश्व स्तर पर लाइव कॉन्सर्ट्स में ध्यान केंद्रित किया।
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