कौन हैं अमला शंकर? जानें भारतीय नृत्य की दिग्गज का अनोखा सफर
अमला शंकर का अद्वितीय सफर
नई दिल्ली, 23 जुलाई। 2012 में, जब कान्स फिल्म फेस्टिवल में रेड कार्पेट बिछा था, तब एक 93 वर्षीय भारतीय महिला ने सभी का ध्यान खींचा। यह अवसर था 1948 की फिल्म 'कल्पना' के डिजिटल संस्करण की विशेष स्क्रीनिंग का। इस वयोवृद्ध नृत्यांगना ने अपनी मुस्कान और आत्मविश्वास के साथ पत्रकारों से मजाक करते हुए कहा, "मैं इस साल कान्स में सबसे युवा फिल्म स्टार हूं"। यह महिला कोई और नहीं, बल्कि भारतीय नृत्य की महान हस्ती और प्रसिद्ध कोरियोग्राफर अमला शंकर थीं।
अमला शंकर का जन्म 27 जून 1919 को बंगाल प्रेसीडेंसी के मगूरा जिले के बाटाजोर गांव में हुआ था। उनका बचपन का नाम अमला नंदी था। उनके पिता, अक्षय कुमार नंदी, शिक्षा और कला के प्रति समर्पित थे और उन्हें प्रकृति से गहरा लगाव था।
1931 में, 11 साल की उम्र में, अमला अपने पिता के साथ पेरिस के 'अंतर्राष्ट्रीय औपनिवेशिक प्रदर्शनी' में गईं। वहां उनकी मुलाकात प्रसिद्ध भारतीय नर्तक उदय शंकर से हुई। उदय शंकर की मां ने उन्हें एक साड़ी भेंट की, जिससे उनके कलात्मक सफर की शुरुआत हुई। वह उदय शंकर के नृत्य दल में शामिल हो गईं। नेताजी सुभाष चंद्र बोस ने उनके पिता को उन्हें अल्मोड़ा स्थित उदय शंकर डांस अकादमी भेजने के लिए प्रेरित किया।
अमला ने 1931 में बेल्जियम में 'कालिया दमन' नामक प्रस्तुति के साथ मंच पर कदम रखा। उदय शंकर और अमला के बीच का संबंध नृत्य के दौरान गहरा होता गया। 1939 में, जब उनका नृत्य दल चेन्नई में था, उदय ने अमला से विवाह का प्रस्ताव रखा। 1942 में, उन्होंने शादी कर ली और इस दंपति ने एक पुत्र, प्रसिद्ध संगीतकार आनंद शंकर, और एक पुत्री, प्रख्यात नृत्यांगना ममता शंकर, को जन्म दिया।
अमला ने 1948 में उदय शंकर की फिल्म 'कल्पना' में मुख्य भूमिका निभाई, जो एक युवा नर्तक के सपनों पर आधारित थी। वह एक बहुमुखी चित्रकार भी थीं, जो अपनी उंगलियों और नाखूनों से कैनवस पर रंग भरती थीं। उन्होंने लेखन में भी योगदान दिया, जिसमें एक पुस्तक की प्रस्तावना नेताजी सुभाष चंद्र बोस ने लिखी थी।
अमला का जीवन केवल कला तक सीमित नहीं था। अल्मोड़ा केंद्र के बंद होने के बाद, उन्होंने कोलकाता में उदय शंकर इंडिया कल्चर सेंटर की स्थापना की, जहां उन्होंने बच्चों को भारतीय कला का ज्ञान दिया। वह 'स्त्री शक्ति - द पैरेलल फोर्स' जैसे सामाजिक अभियानों से भी जुड़ी रहीं।
92 वर्ष की आयु में, उन्होंने 'सीता स्वयंवर' नृत्य नाटिका में राजा जनक की भूमिका निभाई। 24 जुलाई 2020 को, कोलकाता में उनका निधन हो गया।
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