कौन थे मनोहर श्याम जोशी? जानें भारतीय टेलीविजन के जनक की कहानी
मनोहर श्याम जोशी: टेलीविजन के जनक
मुंबई, 29 मार्च। 1980 के दशक में टेलीविजन पर 'हम लोग' ने जो लोकप्रियता हासिल की, वह किसी राष्ट्रीय आंदोलन से कम नहीं थी। इस शो के पीछे की प्रतिभा, मनोहर श्याम जोशी, ने इसे एक अद्वितीय पहचान दी। यह कार्यक्रम भारत का पहला धारावाहिक था, जो नियमित रूप से प्रसारित होता था।
मनोहर श्याम जोशी का जन्म 9 अगस्त 1933 को अजमेर में हुआ। उनकी जड़ें उत्तराखंड के अल्मोड़ा में एक शिक्षित कुमाऊंनी ब्राह्मण परिवार में थीं। दिलचस्प बात यह है कि उन्होंने अपने करियर की शुरुआत विज्ञान से की थी, न कि साहित्य से। लखनऊ विश्वविद्यालय से बीएससी करने के बाद, जोशी ने समाज का गहराई से विश्लेषण करने की कला सीखी।
लखनऊ में, उन्होंने हिंदी साहित्य के महान लेखक अमृतलाल नागर से मुलाकात की, जिन्होंने उन्हें सिखाया कि साहित्य का असली उद्देश्य आम लोगों के दिलों में उतरना है। इसी दौरान मनोहर श्याम जोशी के भीतर एक 'किस्सागो' का जन्म हुआ।
पत्रकारिता में कदम रखते हुए, उन्होंने ऑल इंडिया रेडियो में काम किया और बाद में 'फिल्म्स डिवीजन' में वृत्तचित्र लिखे। उनकी पत्रकारिता का सुनहरा दौर तब आया जब अज्ञेय जी ने उन्हें 'दिनमान' का सहायक संपादक बनाया। इसके बाद, 'साप्ताहिक हिंदुस्तान' के संपादक के रूप में उन्होंने इसे हर घर का हिस्सा बना दिया।
अगर भारत में टेलीविजन को एक सामाजिक शक्ति में बदलने का श्रेय किसी को जाता है, तो वह मनोहर श्याम जोशी हैं। 1984 में प्रसारित 'हम लोग' ने उन्हें 'भारतीय सोप ओपेरा का जनक' बना दिया।
'हम लोग' के बाद, 1986 में आया 'बुनियाद', जिसने भारत-पाकिस्तान विभाजन के दर्द को एक महाकाव्यात्मक तरीके से प्रस्तुत किया। इस शो की सफलता का श्रेय भी जोशी की लेखनी को दिया गया। इसके बाद, 'कक्काजी कहिन' और 'मुंगेरीलाल के हसीन सपने' जैसे शो में उनके व्यंग्य और हास्य ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया।
मनोहर श्याम जोशी ने साहित्य में एक नई दिशा दी। उनका पहला उपन्यास 'कुरु कुरु स्वाहा' (1980) ने साहित्य जगत में हलचल मचा दी।
उनका उपन्यास 'कसप' हिंदी की सबसे सुंदर प्रेम कहानियों में से एक माना जाता है। 'क्याप' के लिए उन्हें 2005 में साहित्य अकादमी पुरस्कार मिला। उनके उपन्यासों में सिनेमा के तत्वों का समावेश होता था, जिससे पाठक को ऐसा लगता था जैसे वे कोई फिल्म देख रहे हों।
30 मार्च 2006 को, मनोहर श्याम जोशी ने 72 वर्ष की आयु में नई दिल्ली में अंतिम सांस ली। तत्कालीन प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह और लेखक खुशवंत सिंह ने उन्हें हिंदी का सबसे नवाचारी लेखक माना।
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