कौन थे असद भोपाली? जानें हिंदी सिनेमा के इस दिग्गज गीतकार की कहानी
असद भोपाली का जीवन और योगदान
मुंबई, 8 जून। हिंदी फिल्म इंडस्ट्री के मशहूर शायर और गीतकार असद भोपाली का निधन 9 जून 1990 को हुआ। उनके द्वारा लिखे गए गीत जैसे 'वो जब याद आए, बहुत याद आए' और 'कबूतर जा जा जा' आज भी संगीत प्रेमियों के दिलों में जीवित हैं।
असद भोपाली का जन्म 10 जुलाई 1921 को मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में हुआ। उनका असली नाम असदुल्लाह खान था। वे एक अरबी और फारसी भाषा के शिक्षक मुंशी अहमद खान के घर में पैदा हुए थे। बचपन से ही उन्हें शायरी का शौक था और कॉलेज के दिनों में वे अपनी कविताएं सुनाते थे।
1949 में फजली ब्रदर्स ने उन्हें भोपाल में एक मुशायरे में देखा, जहां उनकी प्रतिभा की पहचान हुई। इसके बाद उन्होंने मुंबई में अपने करियर की शुरुआत की।
असद ने 1949 से 1990 तक 100 से अधिक फिल्मों में गीत लिखे। उनके गीतों में रोमांस के साथ-साथ हल्के-फुल्के और मजेदार लहजे भी शामिल थे। 1963 में 'पारसमणी' फिल्म में उनके द्वारा लिखे गए 'वो जब याद आए, बहुत याद आए' और 'हंसता हुआ नूरानी चेहरा' जैसे गीतों ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया।
उन्होंने कई प्रमुख संगीतकारों के साथ काम किया और 'सौ बार जनम लेंगे', 'दिल का सूना साज तराना ढूंढेगा' जैसे गीत लिखे। 1989 में सलमान खान की फिल्म 'मैंने प्यार किया' में उनके गीतों ने दर्शकों के दिलों को छू लिया। 'दिल दीवाना बिन सजना के माने ना', 'मेरे रंग में रंगने वाली' और 'कबूतर जा जा जा' जैसे गीतों ने सलमान खान को स्टार बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
असद भोपाली को 1990 में 'दिल दीवाना' गीत के लिए फिल्मफेयर अवॉर्ड मिला, लेकिन वे बीमारी के कारण अवॉर्ड समारोह में शामिल नहीं हो सके। उनका निधन 9 जून 1990 को हुआ।
असद ने दो शादियां की थीं। पहली पत्नी आयशा से उनके दो बेटे (ताज और ताबिश) और छह बेटियां थीं, जबकि दूसरी पत्नी से उनका एक बेटा गालिब असद भोपाली हुआ।
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