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कैलाश खेर ने रचनात्मक आज़ादी पर दी अपनी अनमोल राय, जानें क्या कहा!

प्रसिद्ध गायक कैलाश खेर ने हाल ही में रचनात्मक आज़ादी और संवेदनशीलता पर अपने विचार साझा किए। उन्होंने बताया कि एक सच्चा कलाकार वह होता है जो दूसरों के दर्द को समझता है और उनके चेहरे पर मुस्कान लाने का प्रयास करता है। खेर ने यह भी कहा कि पवित्रता और शिष्टाचार एक कलाकार के लिए आवश्यक गुण हैं। जानें उनके विचारों के पीछे की गहराई और उनके संगीत करियर के बारे में।
 

कैलाश खेर की संवेदनशीलता पर जोर




मुंबई, 20 सितंबर - प्रसिद्ध गायक कैलाश खेर ने हाल ही में एक विशेष बातचीत में रचनात्मक आज़ादी और संवेदनशील विषयों पर अपनी सोच साझा की।


उन्होंने बताया कि एक कलाकार के लिए संवेदनशीलता, शालीनता और संस्कृति के गुण अत्यंत आवश्यक हैं। खेर का मानना है कि एक सच्चा कलाकार वह होता है जो अपने काम के माध्यम से लोगों के चेहरों पर मुस्कान लाने का प्रयास करता है और दूसरों के दर्द को भी समझता है। उनके अनुसार, मंच का उपयोग लोगों के दिलों को जीतने के लिए किया जाना चाहिए।


जब उनसे पूछा गया कि क्या संवेदनशील मुद्दों पर बात करते समय संदर्भ को समझना जरूरी है, तो उन्होंने कहा, "बिल्कुल। एक कलाकार को संवेदनशील होना चाहिए। अगर कोई ऐसा नहीं है और खुद को कलाकार कहता है, तो वह असल में कलाकार नहीं है।"


खेर ने आगे कहा, "बेमतलब की बातें करना या बिना संवेदनशीलता के लोगों का मनोरंजन करना निंदा करने वाले की पहचान हो सकती है। लेकिन व्यंग्य को भी कला का एक रूप माना जा सकता है। हमारी सोच हमेशा पवित्रता की ओर होनी चाहिए।"


उन्होंने यह भी कहा कि सच्ची भावनाएं तभी सार्थक होती हैं जब हम दूसरों के दुख को महसूस कर सकें और उनके चेहरे पर खुशी ला सकें।


कैलाश खेर ने कहा, "एक कलाकार के लिए पवित्रता, शिष्टाचार और संस्कृति होना बहुत जरूरी है।"


ज्ञात हो कि खेर ने 2003 में फिल्म 'वैसा भी होता है पार्ट 2' के गाने 'अल्लाह के बंदे' से लोकप्रियता हासिल की थी। इसके बाद उन्होंने 'तेरी दीवानी', 'सैयां' और 'बम लहरी' जैसे कई हिट गाने गाए हैं।


उन्होंने 'मंगल पांडे: द राइज़िंग', 'कॉर्पोरेट', 'सलाम-ए-इश्क: अ ट्रिब्यूट टू लव' और 'बाहुबली' जैसी कई चर्चित फिल्मों में अपनी आवाज दी है।


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