केदार शर्मा: हिंदी सिनेमा के वो जादूगर जिन्होंने नए सितारों को दिया मौका
केदार शर्मा का जीवन और करियर
मुंबई, 28 अप्रैल। हिंदी फिल्म इंडस्ट्री के प्रसिद्ध निर्माता और निर्देशक केदार शर्मा अपने कठोर स्वभाव और बेहतरीन फिल्मों के लिए जाने जाते थे। उनके बारे में एक दिलचस्प बात यह थी कि अगर वे किसी कलाकार के काम से प्रभावित होते, तो उन्हें दुअन्नी या चवन्नी इनाम में देते, जो बाद में उस कलाकार के लिए एक लकी चार्म बन जाती थी। यही कारण था कि कई कलाकार इस चवन्नी को सालों तक अपने पास रखते थे।
केदार शर्मा का जन्म 12 अप्रैल 1910 को पंजाब के नरौला में हुआ। उनका बचपन संघर्षों से भरा था, लेकिन उन्हें कला, कविता और सिनेमा में गहरी रुचि थी। उनके पिता चाहते थे कि वे शिक्षक बनें, लेकिन केदार का सपना फिल्म इंडस्ट्री में काम करने का था। इस सपने को पूरा करने के लिए उन्होंने घर छोड़कर कोलकाता का रुख किया, जो उस समय फिल्म निर्माण का प्रमुख केंद्र था।
कोलकाता पहुंचने पर उन्हें कई कठिनाइयों का सामना करना पड़ा। शुरुआत में उन्हें फिल्मों में कोई महत्वपूर्ण भूमिका नहीं मिली, लेकिन उन्होंने पोस्टर पेंटर के रूप में काम करना शुरू किया। उनकी चित्रकारी की प्रतिभा ने उन्हें यह अवसर दिया। धीरे-धीरे, उन्होंने फिल्म निर्माण के अन्य पहलुओं को भी सीखा, जैसे कैमरे पर काम करना, छोटे-छोटे रोल करना और कहानी तथा गीत लिखना।
1936 में आई फिल्म 'देवदास' उनके करियर का महत्वपूर्ण मोड़ साबित हुई। इस फिल्म के लिए उन्होंने संवाद और गीत लिखे, और यह फिल्म सुपरहिट रही, जिससे उन्हें इंडस्ट्री में पहचान मिली। इसके बाद, उन्होंने 'चित्रलेखा', 'नील कमल', 'बावरे नैन' और 'जोगन' जैसी कई यादगार फिल्मों का निर्देशन किया।
केदार शर्मा की एक विशेषता यह थी कि वे नए कलाकारों की प्रतिभा को पहचानने में माहिर थे। उन्होंने राज कपूर को एक बड़ा मौका दिया, जब राज कपूर उनकी यूनिट में क्लैपर बॉय के रूप में काम कर रहे थे। केदार शर्मा ने अपनी फिल्म 'नील कमल' में राज कपूर को हीरो बनाया और इसी फिल्म से मधुबाला को भी एक महत्वपूर्ण अवसर दिया, जब वह केवल 13 वर्ष की थीं।
उन्होंने गीता बाली, भारत भूषण और संगीतकार रोशन जैसे कई अन्य कलाकारों को भी आगे बढ़ाया। अगर उन्हें किसी का काम पसंद आता, तो वे उन्हें दुअन्नी या चवन्नी देकर सम्मानित करते थे। यह बात धीरे-धीरे इंडस्ट्री में फैल गई कि केदार शर्मा की दी हुई चवन्नी लकी होती है।
फिल्मों के अलावा, उन्होंने बच्चों के सिनेमा में भी महत्वपूर्ण योगदान दिया। भारतीय बाल फिल्म सोसायटी के लिए उन्होंने कई फिल्में बनाई, जिनमें 'जलदीप' को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सराहा गया। उन्हें भारतीय सिनेमा में उनके योगदान के लिए कई पुरस्कार मिले, जिनमें लाइफटाइम अचीवमेंट अवॉर्ड और महाराष्ट्र सरकार का राज कपूर अवॉर्ड शामिल हैं।
29 अप्रैल 1999 को केदार शर्मा का निधन हो गया। जिस राज कपूर अवॉर्ड से उन्हें सम्मानित किया जाना था, उसके मिलने से ठीक एक दिन पहले उन्होंने इस दुनिया को अलविदा कह दिया।
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