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कृति सेनन का भावुक संदेश: बेटियों की सुरक्षा पर गंभीर सवाल उठाए

बॉलीवुड अभिनेत्री कृति सेनन ने 'डॉटर्स डे' के अवसर पर महिलाओं की सुरक्षा पर एक भावुक संदेश साझा किया है। उन्होंने युवा महिलाओं की चिंताओं और समाज में व्याप्त डर के माहौल पर गंभीर सवाल उठाए। कृति ने हाल की घटनाओं के संदर्भ में एक सुरक्षित दुनिया की आवश्यकता पर जोर दिया और कहा कि बदलाव के लिए मानसिकता में बदलाव जरूरी है। उनके इस संदेश को सोशल मीडिया पर व्यापक सराहना मिल रही है, जहां लोग मानते हैं कि महिलाओं के लिए सुरक्षित माहौल बनाना समाज की जिम्मेदारी है।
 

कृति सेनन का संदेश बेटियों की सुरक्षा पर



मुंबई, 28 सितंबर (वेब वार्ता)। 'डॉटर्स डे' के अवसर पर, बॉलीवुड की मशहूर अभिनेत्री कृति सेनन ने महिलाओं की सुरक्षा और समाज में व्याप्त डर के माहौल पर एक गहन और भावुक पोस्ट साझा की है। इंस्टाग्राम पर साझा की गई इस पोस्ट में उन्होंने बताया कि आज की युवा महिलाएं और बेटियां हर समय सतर्क रहने के लिए मजबूर हैं। उन्होंने अकेले घर लौटने, फोन बंद होने और लाइव लोकेशन साझा करने जैसी रोजमर्रा की चिंताओं का उल्लेख करते हुए समाज के सिस्टम पर गंभीर सवाल उठाए हैं और एक सुरक्षित दुनिया की कल्पना की है।


दिल्ली और जमुई में हाल में हुई घटनाओं के बीच कृति का यह पोस्ट महिलाओं के असुरक्षित माहौल पर चल रही बहस को और भी गहरा करता है। हाल ही में दक्षिण दिल्ली के आस्था कुंज पार्क में एक नाबालिग के साथ हुई दरिंदगी के बाद, दिल्ली विश्वविद्यालय की छात्राओं ने सड़कों पर उतरकर सुरक्षा की मांग की है। कृति की इस पोस्ट पर सोशल मीडिया पर लोगों की तीखी प्रतिक्रियाएं आ रही हैं, जिसमें कई लोग मानते हैं कि महिलाओं के लिए सुरक्षित माहौल बनाना समाज की सामूहिक जिम्मेदारी है।


कृति ने अपने संदेश में बदलाव के लिए मानसिकता में बदलाव की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि जब तक बेटियां निडर होकर नहीं जीतीं, तब तक जश्न अधूरा है। अपनी पोस्ट के अंत में, उन्होंने हर उस बेटी को समर्पित संदेश दिया जो घर सुरक्षित पहुंचने के बाद अपने परिजनों को फोन करती है। उन्होंने आशा व्यक्त की कि एक दिन ऐसा आएगा जब महिलाओं को अपनी सुरक्षा के लिए संघर्ष नहीं करना पड़ेगा। उनके इस बयान की सोशल मीडिया पर काफी सराहना हो रही है, और लोग मानते हैं कि केवल कानूनों से नहीं, बल्कि समाज की सोच और लड़कों की परवरिश में बदलाव लाकर ही महिलाओं के लिए एक सुरक्षित और भयमुक्त माहौल सुनिश्चित किया जा सकता है।


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