कश्मीरी फिल्म 'बट्ट कोच': अशोक पंडित ने दी सराहना और शुभकामनाएं
अशोक पंडित की प्रशंसा
मुंबई, 16 मार्च। कश्मीरी पंडित और फिल्म निर्माता अशोक पंडित ने कश्मीरी भाषा में बनी फिल्म 'बट्ट कोच' की सराहना की है। उन्होंने सोशल मीडिया पर एक वीडियो साझा करते हुए इसे भावनात्मक, प्रभावशाली और दिल को छू लेने वाला बताया।
अशोक पंडित ने इंस्टाग्राम पर वीडियो में लिखा, "यह फिल्म दर्शकों को पूरी तरह से बांधकर रखती है, सोचने पर मजबूर करती है और गहरा संदेश देती है।" वीडियो में उन्होंने कहा, “हम सभी जानते हैं कि 1990 में कश्मीरी पंडितों का निष्कासन हुआ, उनका नरसंहार हुआ, और उनकी जातीय सफाई की गई, जिससे पूरी कौम बेघर हो गई।”
उन्होंने बताया कि फिल्म का शीर्षक 'बट्ट कोच' है, जिसमें 'कोच' कश्मीरी पंडितों की गली को दर्शाता है। फिल्म में यह दिखाया गया है कि इतनी बड़ी त्रासदी के बावजूद अगली पीढ़ी ने माता-पिता की कहानियों के माध्यम से अपनी जड़ों से जुड़ाव बनाए रखा।
अशोक पंडित ने फिल्म के निर्देशकों सिद्धार्थ कौल और अंकित वली की विशेष प्रशंसा की। उन्होंने कहा, “हमारी कम्युनिटी के ये दो युवा सिद्धार्थ और अंकित ने सोचा कि वे अपनी पीड़ा को फिल्म के माध्यम से दुनिया के सामने लाएंगे। आज के समय में फिल्म बनाना और उसे रिलीज करना एक बड़ी उपलब्धि है। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि उन्होंने बंदूक नहीं उठाई, बल्कि कला का सहारा लिया और अपनी कहानी को लोगों तक पहुंचाने का प्रयास किया।”
उन्होंने प्रोड्यूसर विनायक के साहस और जुनून की भी सराहना की। उन्होंने कहा, “पैसे और फंड के बिना सपने पूरे नहीं होते। विनायक ने विश्वास जताया और फिल्म बनाई।”
अशोक पंडित ने एम.के. रैना, कुसुम धर, अनिल कौल चिंगारी, कुसुम तिक्कू, साक्षी भट्ट, श्रीमे भट्ट, दिलीप पंडिता और अन्य कलाकारों के अभिनय की भी प्रशंसा की। उन्होंने फिल्म के संगीत की तारीफ करते हुए कहा कि सौरभ झाड़ू ने कश्मीरी लोक-संगीत की शैली में संगीत तैयार किया है, जो पंडित परिवार की भावनाओं को बखूबी प्रस्तुत करता है। कैमरा वर्क, एडिटिंग (आकांक्षा झाड़ू), कॉस्ट्यूम्स और पोस्ट-प्रोडक्शन सभी कुछ शानदार हैं।
अशोक पंडित ने कैप्शन में लिखा, “पूरी टीम को ढेर सारी शुभकामनाएं। उम्मीद है कि इस साल 'क्षेत्रीय फिल्म' श्रेणी के सभी पुरस्कार आप ही जीतेंगे। फिल्म ने घाटी की यादों में ले जाकर भावुक कर दिया। यह फिल्म मानवता पर आधारित है। कम बजट में बनी यह छोटी-सी कश्मीरी फिल्म लोगों के सामने आई और अमिट छाप छोड़ गई।”
अंत में, अशोक पंडित ने कहा, “यह फिल्म कश्मीरी पंडितों के लिए एक मील का पत्थर है। यह हमेशा याद रखी जाएगी।” उन्होंने सिद्धार्थ और अंकित को याद करते हुए कहा कि जब वे स्क्रिप्ट लेकर आए थे, उनकी आंखों में पैशन और ईमानदारी देखकर पता था कि फिल्म एक दिन रिलीज होगी।
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