ओम पुरी: संघर्ष से सफलता तक, एक अद्वितीय अभिनेता की कहानी
ओम पुरी का संघर्ष और सफलता
मुंबई, 5 जनवरी। दिवंगत अभिनेता ओम पुरी की जीवन यात्रा संघर्ष, मेहनत और उपलब्धियों की एक प्रेरणादायक कहानी है। उन्होंने बॉलीवुड से हॉलीवुड तक अपनी अदाकारी से एक विशेष पहचान बनाई। उनका बचपन बेहद कठिनाइयों में बीता, और केवल छह साल की उम्र में उन्होंने अपने परिवार की आर्थिक स्थिति सुधारने के लिए चाय की दुकान पर बर्तन धोने का काम शुरू किया।
ओम पुरी का सपना लोको पायलट बनने का था, लेकिन किस्मत ने उन्हें अभिनय की दुनिया में ला खड़ा किया। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत मराठी फिल्म 'घासीराम कोतवाल' से की, लेकिन हिंदी सिनेमा में उन्हें पहचान 1980 की फिल्म 'आक्रोश' से मिली। इस फिल्म में उनके अभिनय को काफी सराहा गया और उन्हें फिल्मफेयर का सर्वश्रेष्ठ सहायक अभिनेता पुरस्कार मिला।
उनका जन्म 18 अक्टूबर 1950 को पंजाब के पटियाला में हुआ। आर्थिक तंगी के कारण उन्होंने बचपन में कई छोटे-मोटे काम किए। ओम पुरी की दूसरी पत्नी नंदिता ने उनकी जिंदगी पर 'अनलाइकली हीरो: ओम पुरी' नाम की किताब लिखी है, जिसमें उनके जीवन के कई पहलुओं का जिक्र है।
उन्होंने नेशनल स्कूल ऑफ ड्रामा में दाखिला लिया, जहां उनकी मुलाकात नसीरुद्दीन शाह से हुई। दोनों के बीच गहरी दोस्ती हो गई, और ओम पुरी ने कई बार कहा कि नसीरुद्दीन शाह उनके करियर के लिए एक महत्वपूर्ण व्यक्ति रहे हैं।
ओम पुरी ने गंभीर और यथार्थवादी भूमिकाओं के साथ-साथ कॉमेडी में भी अपनी प्रतिभा दिखाई। उन्होंने 'सिटी ऑफ जॉय', 'वुल्फ', और 'द घोस्ट एंड द डार्कनेस' जैसी हॉलीवुड फिल्मों में भी काम किया।
उनका निधन 6 जनवरी 2017 को दिल का दौरा पड़ने से हुआ, और वे 66 वर्ष के थे। ओम पुरी ने अपने जीवन में कई युवा कलाकारों को प्रेरित किया और मार्गदर्शन दिया।
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