इमरान खान: बॉलीवुड का चॉकलेटी बॉय, जो बन गए थे फ्लॉप फिल्मों का शिकार!
इमरान खान का फिल्मी सफर
मुंबई, 12 जनवरी। बॉलीवुड में कई ऐसे सितारे हैं जिन्होंने अपनी मेहनत और प्रतिभा से नाम कमाया है। इनमें से एक इमरान खान हैं, जो सुपरस्टार आमिर खान के भांजे हैं। इमरान ने अपनी पहली फिल्म 'जाने तू... या जाने ना' से धमाल मचाया, जो एक बड़ी हिट साबित हुई और उन्होंने युवा दर्शकों का दिल जीत लिया।
उनकी आकर्षक लुक और स्वाभाविक अभिनय ने उन्हें स्टार बना दिया, लेकिन इसके बाद उनकी कई फिल्में असफल रहीं, जिससे उनका करियर प्रभावित हुआ। धीरे-धीरे, इमरान ने बॉलीवुड से दूरी बना ली।
इमरान खान का जन्मदिन 13 जनवरी को है। उनकी जिंदगी में सुपरहिट डेब्यू, फ्लॉप फिल्मों और व्यक्तिगत जीवन के उतार-चढ़ाव शामिल हैं। इमरान ने 2008 में अपनी पहली फिल्म से दर्शकों का ध्यान आकर्षित किया।
आमिर खान के प्रोडक्शन हाउस के तहत बनी यह रोमांटिक फिल्म सफल रही और इमरान को स्टारडम दिलाया। उनकी क्यूट लुक और स्वाभाविक अभिनय ने उन्हें दर्शकों का प्रिय बना दिया।
इसके बाद, उन्होंने 2010 में 'आई हेट लव स्टोरीज' में काम किया, जो औसत से बेहतर रही। 2011 में आई 'दिल दोस्ती डांस' और 'मेरे ब्रदर की दुल्हन' भी सफल रहीं, जिससे इमरान को रोमांटिक हीरो के रूप में पहचान मिली। लेकिन इसके बाद उनका करियर गिरावट की ओर बढ़ने लगा।
2011 में 'ब्रेक के बाद' रिलीज हुई, जो असफल रही। 2012 में 'एक मैं और एक तू' भी बॉक्स ऑफिस पर नहीं चली। इसके बाद उनकी कुछ अन्य फिल्में भी दर्शकों को पसंद नहीं आईं। 2015 में 'कट्टी बट्टी' उनकी आखिरी बड़ी रिलीज थी, जो पूरी तरह फ्लॉप रही। इसके बाद इमरान ने फिल्मों से दूरी बना ली।
व्यक्तिगत जीवन की बात करें तो इमरान ने 2011 में अपनी बचपन की दोस्त अवंतिका मलिक से शादी की थी। यह जोड़ी काफी चर्चा में रही, लेकिन 2019 में दोनों ने अलग होने का निर्णय लिया। तलाक के बाद, इमरान ने अपनी बेटी इमारा के साथ समय बिताने पर ध्यान केंद्रित किया।
उन्होंने एक इंटरव्यू में बताया कि 2016 से उनका बुरा दौर शुरू हुआ, जब वे मानसिक रूप से टूट गए थे। उन्होंने कहा, "जब मैं पिता बना, तो लगा कि मुझे अपनी बेटी के लिए अपना सर्वश्रेष्ठ रूप बनना है। पैसे की चिंता नहीं थी, लेकिन मानसिक रूप से मैं बहुत परेशान था।"
एक्टिंग छोड़ने के बाद उनकी जीवनशैली में भी बड़ा बदलाव आया।
इमरान ने एक इंटरव्यू में बताया कि 2005 में जब वह अपनी पढ़ाई पूरी कर भारत लौटे, तो वह डायरेक्टर और राइटर बनना चाहते थे। उन्होंने अपनी स्क्रिप्ट एक टीवी चैनल को दी, लेकिन उनकी कहानी चुराई गई। इस घटना ने उन्हें निराश किया, लेकिन इसके बाद उनकी मुलाकात अब्बास-मस्तान से हुई, जिसके बाद 'जाने तू... या जाने ना' का रास्ता खुला।
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