इंदिरा कृष्णन ने साझा किया जीवन का महत्वपूर्ण सबक: 'सितंबर ने सिखाया कि हर कोई साथ चलने के लिए नहीं बना'
इंदिरा कृष्णन का जीवन का सबक
मुंबई, 5 अक्टूबर। अभिनेत्री इंदिरा कृष्णन अपने अभिनय के साथ-साथ सोशल मीडिया पर भी काफी सक्रिय हैं। हाल ही में, उन्होंने जीवन के कुछ महत्वपूर्ण सबकों पर चर्चा की और 'अक्टूबर थ्योरी' पर अपने काम के बारे में भी बताया।
इंस्टाग्राम पर उन्होंने अपनी कुछ तस्वीरें साझा कीं, जिसमें उन्होंने लिखा, "सितंबर ने मुझे यह सिखाया कि हर कोई मेरे साथ चलने के लिए नहीं बना है। कुछ लोगों ने निराश किया, जबकि कुछ ने अपनी असली पहचान दिखाई। लेकिन समय के साथ, मैंने यह समझा कि अकेले रहने से मुझे अब डर नहीं लगता। उन सभी का धन्यवाद जिन्होंने मुझे सपनों से अधिक वास्तविकता सिखाई।"
उन्होंने आगे कहा, "मैंने उन रिश्तों का पीछा करना छोड़ दिया है जो मेरे लिए नहीं बने। मैंने अपनी आत्म-सम्मान को प्राथमिकता दी है। अब मैं हल्का महसूस कर रही हूं और अक्टूबर का स्वागत कर रही हूं। अपने परिवार, काम और उस खूबसूरत जिंदगी के लिए जो मैं फिर से बना रही हूं। अक्टूबर, दयालुता, खुशी और प्यार से भरा हो। खुद से प्यार करना, अपनी अच्छाई से प्यार करना और अपनी कीमत को समझना।"
इंदिरा कृष्णन वर्तमान में जीटीवी के धारावाहिक 'गंगा माई की बेटियां' में दुर्गावती की भूमिका निभा रही हैं। इसके अलावा, वह नितेश तिवारी की बहुप्रतीक्षित फिल्म 'रामायण' में भगवान राम की माता कौशल्या का किरदार भी निभाएंगी।
सोशल मीडिया पर चर्चा में रही 'अक्टूबर थ्योरी' एक मनोवैज्ञानिक ट्रेंड है, जो अक्टूबर को साल के दूसरे नए साल के रूप में देखता है। इस थ्योरी का मानना है कि लोग जनवरी में नए साल के संकल्प लेने का इंतजार करने के बजाय, अक्टूबर से शुरू होने वाले अंतिम तीन महीनों में अपने जीवन, लक्ष्यों और आदतों को फिर से व्यवस्थित कर सकते हैं।
साल के बाकी नौ महीनों के अनुभवों के बाद, यह समय खुद को व्यवस्थित करने और पुराने लक्ष्यों को फिर से जीवित करने का होता है। मनोवैज्ञानिक इसे 'फ्रेश स्टार्ट इफेक्ट' कहते हैं, जहां एक निश्चित समय या बदलाव के बाद व्यक्ति अधिक प्रेरित महसूस करता है।
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