अरमान मलिक: जानिए कैसे बने बॉलीवुड के सबसे प्रिय सिंगर!
अरमान मलिक का संगीत सफर
मुंबई, 21 जुलाई। बॉलीवुड में अपनी मधुर आवाज से लाखों दिलों में जगह बनाने वाले अरमान मलिक अब किसी परिचय के मोहताज नहीं हैं। रोमांटिक गानों से लेकर पॉप म्यूजिक तक, उन्होंने अपनी एक अलग पहचान बनाई है। लेकिन बहुत कम लोग जानते हैं कि उनका संगीत सफर बहुत छोटी उम्र में ही शुरू हुआ था। अरमान ने केवल 9 साल की उम्र में टीवी की दुनिया में कदम रखा और अपनी आवाज से सबका ध्यान खींचा।
अरमान का जन्म 22 जुलाई 1995 को मुंबई में हुआ। वह एक ऐसे परिवार से हैं, जहां संगीत की परंपरा पीढ़ियों से चली आ रही है। उनके दादा सरदार मलिक हिंदी सिनेमा के प्रसिद्ध संगीतकार थे, जबकि उनके पिता डब्बू मलिक भी संगीत के क्षेत्र में सक्रिय हैं। उनके चाचा अनु मलिक भी बॉलीवुड के जाने-माने म्यूजिक डायरेक्टर हैं। ऐसे माहौल में अरमान को बचपन से ही संगीत सीखने का अवसर मिला।
जब अरमान केवल 4 साल के थे, तब उनके माता-पिता ने उनकी संगीत प्रतिभा को पहचाना और उन्होंने हिंदुस्तानी शास्त्रीय संगीत की शिक्षा लेना शुरू की। धीरे-धीरे संगीत उनके जीवन का अभिन्न हिस्सा बन गया और उन्होंने स्कूल के कई संगीत प्रतियोगिताओं में भाग लेना शुरू किया।
अरमान की पहचान तब बनी जब उन्होंने प्रसिद्ध सिंगिंग रियलिटी शो 'सा रे गा मा पा लिटिल चैंप्स' में भाग लिया। 2006 में आए इस शो में उनकी उम्र केवल 9 साल थी। इतनी कम उम्र में भी उनकी आवाज और आत्मविश्वास ने दर्शकों को प्रभावित किया। हालांकि, वह इस शो के विजेता नहीं बन पाए, लेकिन टॉप 7 कंटेस्टेंट्स में जगह बनाने में सफल रहे। यह शो उनके लिए आगे बढ़ने का एक महत्वपूर्ण कदम साबित हुआ।
इस शो के बाद, अरमान ने चाइल्ड सिंगर के रूप में बॉलीवुड में काम करना शुरू किया। 2007 में, उन्होंने फिल्म 'तारे जमीन पर' के गाने 'बम बम बोले' में अपनी आवाज दी। इसके बाद, उन्होंने अमिताभ बच्चन की फिल्म 'भूतनाथ' के लिए भी गाना गाया। बचपन में ही बॉलीवुड फिल्मों में अपनी आवाज देना उनके लिए एक बड़ी उपलब्धि थी।
अरमान ने डबिंग में भी हाथ आजमाया। उन्होंने फिल्म 'माय नेम इज खान' में एक बच्चे की आवाज को हिंदी में डब किया। इसके अलावा, उन्होंने 'स्लमडॉग मिलेनियर' के रेडियो वर्जन में सलीम के किरदार को आवाज दी। समय के साथ, अरमान ने अपनी अलग पहचान बनानी शुरू की। 2014 में सलमान खान की फिल्म 'जय हो' के गाने 'तुमको तो आना ही था' से उन्हें बतौर प्लेबैक सिंगर बड़ी पहचान मिली। इसके बाद उन्होंने 'मैं रहूं या न रहूं', 'बेसब्रियां', 'चले आना', 'क्यों रब्बा' और 'ठहर जा' जैसे कई हिट गाने गाए।
अरमान ने बॉलीवुड के अलावा कई भाषाओं में भी गाने गाए हैं। उन्होंने हिंदी के साथ-साथ तेलुगु, कन्नड़, बंगाली, गुजराती, मराठी और अंग्रेजी में भी अपनी आवाज दी है। वह उन सिंगर्स में शामिल हैं, जिन्होंने लंदन के वेम्बली थिएटर जैसे बड़े मंच पर लाइव परफॉर्म किया।
अरमान मलिक को कई प्रतिष्ठित पुरस्कार भी मिले हैं। उन्हें फिल्मफेयर आरडी बर्मन अवॉर्ड, ग्लोबल इंडियन म्यूजिक अवॉर्ड, बिग स्टार एंटरटेनमेंट अवॉर्ड और एमटीवी यूरोप म्यूजिक अवॉर्ड जैसे सम्मान प्राप्त हुए हैं।
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