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अनु मलिक की संघर्ष की कहानी: कैसे मिले उन्हें पहले ब्रेक और पिता को दिया कार का तोहफा?

अनु मलिक ने अपने संघर्ष के दिनों को याद करते हुए बताया कि कैसे उन्होंने हिंदी फिल्म संगीत में अपनी पहचान बनाई। उन्होंने अपने पिता को एक कार उपहार में दी, जब उनका करियर सफल हुआ। जानें उनकी प्रेरणादायक कहानी और संघर्ष के बारे में।
 

अनु मलिक का संघर्ष और सफलता




मुंबई, 4 नवंबर। प्रसिद्ध संगीतकार अनु मलिक ने एक बार साझा किया था कि कैसे उन्होंने हिंदी फिल्म संगीत में अपनी पहचान बनाने के बाद अपने पिता सरदार मलिक को एक कार उपहार में दी।


हाल ही में, गीतकार समीर के साथ उनकी एक पुरानी बातचीत का वीडियो सोशल मीडिया पर फिर से चर्चा का विषय बन गया है। इस क्लिप में अनु मलिक अपने शुरुआती संघर्ष के दिनों को याद करते हैं, जब हिंदी फिल्म संगीत पर आर. डी. बर्मन, कल्याणजी-आनंदजी और लक्ष्मीकांत-प्यारेलाल जैसे दिग्गजों का राज था।


अनु मलिक ने कहा, "उस समय आर. डी. बर्मन सबसे प्रमुख संगीतकार थे, जिनकी सभी इज्जत करते थे। कल्याणजी-आनंदजी और लक्ष्मीकांत-प्यारेलाल का भी बोलबाला था। उनके साथ एक गाना रिकॉर्ड करना बहुत बड़ी उपलब्धि मानी जाती थी। उस समय महबूब स्टूडियो, फिल्म सेंटर स्टूडियो और फेमस स्टूडियो हमेशा बुक रहते थे, जिससे फिल्में और म्यूजिशियन मिलना मुश्किल था। लता जी, आशा जी और किशोर कुमार जैसे गायकों की डेट्स लेना भी कठिन था।"


उन्होंने बताया कि वह घंटों महबूब स्टूडियो के बाहर खड़े रहते थे, लेकिन अंदर जाने का मौका नहीं मिलता था। जब कोई प्रोड्यूसर आता, तो वह कहते, 'सर, मेरा गाना सुन लीजिए'।


अनु ने आगे कहा, "एक प्रसिद्ध कहानी है कि मुझे एक फिल्म तब मिली जब मैंने डायरेक्टर को बाथरूम में अपना गाना सुनाया। मैंने ऐसा इसलिए किया क्योंकि कोई सुनने वाला नहीं था। जब प्रोड्यूसर्स मेरे पास आने लगे, तब चीजें बदलने लगीं।"


संगीतकार ने बताया कि जब उनका करियर सही दिशा में बढ़ने लगा, तो उन्होंने अपने पिता को एक कार उपहार में दी। उन्होंने कहा, "जब मेरा काम चलने लगा, तो मैंने अपने पिता को बस स्टॉप पर खड़ा देखा और उन्हें एक कार गिफ्ट की, कहा कि पापा, अब से ड्राइवर और कार आपकी है।"


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