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अनुपम खेर: 40 सालों का सफर, हर किरदार में जादू का एहसास

अनुपम खेर, भारतीय सिनेमा के एक अद्वितीय अभिनेता, ने 40 वर्षों में विभिन्न प्रकार के किरदार निभाए हैं। उनकी यात्रा 'सारांश' से शुरू होकर अंतरराष्ट्रीय फिल्मों तक फैली है। जानें उनके जीवन, करियर और समाजसेवा के बारे में, जिसमें उन्हें कई पुरस्कार भी मिले हैं। क्या आप जानते हैं कि उन्होंने निर्देशन और प्रोडक्शन में भी हाथ आजमाया है? इस लेख में उनके अद्वितीय सफर के बारे में और जानें।
 
अनुपम खेर: 40 सालों का सफर, हर किरदार में जादू का एहसास

अनुपम खेर का अद्वितीय करियर




मुंबई, 6 मार्च। भारतीय सिनेमा में कुछ कलाकार ऐसे हैं जो हर बार नए अंदाज में दर्शकों का मनोरंजन करते हैं, और अनुपम खेर उनमें से एक हैं। चाहे वह कॉमेडी हो या नकारात्मक भूमिका, बुजुर्ग पिता का किरदार हो या पुलिस कमिश्नर का, उन्होंने हर प्रकार के रोल को बखूबी निभाया है। उन्हें चुनौतियों का सामना करना पसंद है, और यही कारण है कि उनका करियर 40 वर्षों से भी अधिक समय तक सफलतापूर्वक जारी है। उनकी फिल्मों में हर बार एक नया अंदाज और जज्बा देखने को मिलता है।


अनुपम खेर का जन्म 7 मार्च 1955 को हिमाचल प्रदेश के शिमला में हुआ। वह एक कश्मीरी पंडित परिवार से हैं। उनके पिता, पुष्कर नाथ खेर, वन विभाग में क्लर्क थे, जबकि उनकी माता, दुलारी खेर, घर संभालती थीं। बचपन से ही उन्हें अभिनय में रुचि थी, जिसके चलते उन्होंने अपनी पढ़ाई बीच में छोड़कर चंडीगढ़ के पंजाबी विश्वविद्यालय में भारतीय नाटक की पढ़ाई की। बाद में, उन्होंने नेशनल स्कूल ऑफ ड्रामा में भी दाखिला लिया।


अनुपम खेर की फिल्मी यात्रा की शुरुआत 1984 में महेश भट्ट की फिल्म 'सारांश' से हुई। इस फिल्म में उन्होंने 28 साल की उम्र में 65 साल के बुजुर्ग पिता का किरदार निभाया, जिससे दर्शक हैरान रह गए। जब उनसे इस बारे में पूछा जाता, तो वह मुस्कुराते हुए कहते, 'यह फिल्म है, जादू है!' इस भूमिका के लिए उन्हें फिल्मफेयर बेस्ट एक्टर का पुरस्कार भी मिला।


इसके बाद, अनुपम खेर ने नकारात्मक भूमिकाओं में भी अपनी छाप छोड़ी। 'कर्मा', 'तेजाब', और 'चालबाज' जैसी फिल्मों में उनके विलेन के किरदार को दर्शकों ने बहुत पसंद किया। इसके साथ ही, उन्होंने कॉमिक भूमिकाओं में भी अपनी प्रतिभा दिखाई। 'राम लखन' में उनका कॉमिक किरदार इतना लोकप्रिय हुआ कि उन्हें फिल्मफेयर बेस्ट परफॉर्मेंस इन कॉमिक रोल अवार्ड से नवाजा गया।


अनुपम खेर ने अपने जीवन के हर चरण में चुनौतियों को स्वीकार किया। 'डैडी' फिल्म में उनका किरदार बेहद जटिल था, जिसके लिए उन्हें नेशनल फिल्म अवार्ड स्पेशल जूरी और फिल्मफेयर क्रिटिक्स अवार्ड मिला। वह हमेशा कहते हैं कि हर किरदार में नया प्रयोग जरूरी है, और इसी कारण उनकी फिल्मों में हर किरदार में अलग जीवन दिखाई देता है।


बॉलीवुड के अलावा, अनुपम खेर ने अंतरराष्ट्रीय फिल्मों में भी काम किया है। 'बेंड इट लाइक बेकहम', 'लास्ट', 'काउंटिंग', और 'सिल्वर लाइनिंग्स प्लेबुक' जैसी फिल्मों में उनके अभिनय को आज भी याद किया जाता है। ब्रिटिश टीवी फिल्म 'द बॉय विद द टॉप कनॉट' में उनके काम के लिए उन्हें बाफ्टा में नामांकन भी मिला।


अनुपम खेर ने केवल अभिनय नहीं किया, बल्कि निर्देशन और प्रोडक्शन में भी हाथ आजमाया। 'ओम जय जगदीश' और 'मैंने गांधी को नहीं मारा' जैसी फिल्मों को उन्होंने निर्देशित और प्रोड्यूस किया। वह एक्टिंग स्कूल 'एक्टर प्रिपेयर्स' के संस्थापक भी हैं। टीवी पर उन्होंने 'न्यू एम्स्टर्डम' और 'मिसेज विल्सन' जैसे शोज में भी काम किया।


उनकी कला और समाजसेवा के लिए भारत सरकार ने उन्हें 2004 में पद्मश्री और 2016 में पद्मभूषण से सम्मानित किया। 2021 में, उन्हें हिंदू यूनिवर्सिटी ऑफ अमेरिका से ऑनररी डॉक्टरेट की डिग्री भी मिली।


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