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अनुपम खेर की फिल्म 'तन्वी द ग्रेट' ने काला घोड़ा आर्ट्स फेस्टिवल में मचाई धूम!

अनुपम खेर की फिल्म 'तन्वी द ग्रेट' ने हाल ही में काला घोड़ा आर्ट्स फेस्टिवल में शानदार प्रदर्शन किया। इस फिल्म ने दर्शकों के दिलों में खास जगह बनाई और कई भावुक प्रतिक्रियाएं प्राप्त कीं। अनुपम ने इस अवसर पर अपनी भावनाएं साझा कीं और बताया कि फिल्म ने ऑटिज्म के प्रति संवेदनशीलता को बढ़ावा दिया। जानें इस फिल्म की कहानी और दर्शकों की प्रतिक्रियाएं।
 
अनुपम खेर की फिल्म 'तन्वी द ग्रेट' ने काला घोड़ा आर्ट्स फेस्टिवल में मचाई धूम!

फिल्म 'तन्वी द ग्रेट' की शानदार प्रस्तुति


मुंबई, 5 फरवरी। अभिनेता अनुपम खेर की नई फिल्म 'तन्वी द ग्रेट' ने दर्शकों के दिलों में एक विशेष स्थान बना लिया है। हाल ही में, इस फिल्म को मुंबई के प्रसिद्ध काला घोड़ा आर्ट्स फेस्टिवल में प्रदर्शित किया गया, जहां इसे दर्शकों ने बेहद पसंद किया।


अनुपम खेर ने इंस्टाग्राम पर इस फेस्टिवल के लिए आभार व्यक्त किया। उन्होंने इवेंट की कुछ तस्वीरें साझा करते हुए लिखा कि इस ऐतिहासिक फेस्टिवल में अपनी फिल्म दिखाने का अवसर पाकर उन्हें गर्व महसूस हुआ। उन्होंने कहा, "फेस्टिवल का माहौल, स्थान और व्यवस्था सभी बहुत अच्छे थे। सभी वॉलंटियर्स ने अद्भुत काम किया।"


अभिनेता ने यह भी साझा किया कि फिल्म देखने के बाद दर्शकों की प्रतिक्रियाओं ने उन्हें भावुक कर दिया। उन्होंने लिखा, "लोग तालियां बजा रहे थे, हंस रहे थे, और कुछ की आंखों में आंसू भी थे। मॉडरेटर जूही ने सत्र को बहुत संवेदनशीलता और गर्मजोशी से संभाला।"


अनुपम ने बताया कि सवाल-जवाब का सत्र एक दिल को छू लेने वाला अनुभव था। इस दौरान एक व्यक्ति भावुक हो गए थे। उन्होंने कहा, "फिल्म में लीड अभिनेत्री शुभांगी दत्त के अभिनय ने उन्हें अपने 25 वर्षीय ऑटिस्टिक बेटे की याद दिला दी। मैंने उनसे कहा कि घर जाकर अपने बेटे को मेरी तरफ से गले लगाएं। बाद में उन्होंने बताया कि उनके बेटे का हाल ही में निधन हो गया है, लेकिन तन्वी के किरदार ने उन्हें थोड़ा सुकून दिया।"


अंत में, अनुपम ने लिखा कि कभी-कभी सिनेमा सच में जादू कर देता है, खासकर 'तन्वी द ग्रेट' जैसी फिल्मों के माध्यम से।


फिल्म 'तन्वी द ग्रेट' में अनुपम खेर ने न केवल अभिनय किया है, बल्कि इसका निर्देशन भी किया है। इस फिल्म में शुभांगी दत्त मुख्य भूमिका में हैं। कहानी एक ऑटिस्टिक लड़की की है, जो अपने नजरिए से दुनिया को देखती है और विभिन्न बाधाओं को पार करती है। इस फिल्म ने दर्शकों का दिल जीत लिया और ऑटिज्म के प्रति संवेदनशीलता को बढ़ावा दिया।


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