समृद्धि शुक्ला ने साझा की शादी और जिम्मेदारियों पर अपनी सोच, जानें क्या कहा!
समृद्धि शुक्ला का सामाजिक मुद्दों पर विचार
मुंबई, 26 जुलाई। टेलीविजन की प्रसिद्ध अभिनेत्री समृद्धि शुक्ला, जो कि शो 'ये रिश्ता क्या कहलाता है' में अभिरा के किरदार के लिए जानी जाती हैं, ने हाल ही में घर-परिवार और जिम्मेदारियों के बंटवारे पर अपने विचार साझा किए हैं। उनकी दमदार एक्टिंग के साथ-साथ सामाजिक मुद्दों पर उनकी स्पष्ट राय भी दर्शकों को प्रभावित कर रही है।
समृद्धि ने कहा कि आज भी कई महिलाओं से यह अपेक्षा की जाती है कि वे घर और काम दोनों की जिम्मेदारियां अकेले संभालें। उनका मानना है कि परिवार की जिम्मेदारी पति और पत्नी दोनों को मिलकर निभानी चाहिए।
उन्होंने मीडिया से बातचीत में बताया, ''अभी भी कई महिलाएं ऐसी हैं, जिनसे हर काम को संभालने की उम्मीद की जाती है। उन्हें बच्चों की देखभाल करने, नौकरी करने और घर की सभी जिम्मेदारियों को निभाने के लिए कहा जाता है। कई बार महिलाएं खाना नहीं बनातीं, फिर भी उनसे यह अपेक्षा की जाती है कि वे घर की हर व्यवस्था पर नजर रखें।''
समृद्धि ने आगे कहा, ''इस सोच को बदलने की आवश्यकता है। जब दो लोग शादी करते हैं, तो वे एक नई जिंदगी की शुरुआत करते हैं। दोनों को घर की सुविधाओं का समान रूप से उपयोग करना चाहिए और बच्चों की परवरिश में भी बराबर की भागीदारी होनी चाहिए।''
उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा, ''यदि किसी महिला ने बच्चे को जन्म दिया है और वह कुछ समय के लिए काम पर नहीं जा सकती, तो उस समय पति को जिम्मेदारियों को संभालना चाहिए। जब महिला अपने करियर की ओर लौटना चाहे, तो पति को घर के कामों में मदद करनी चाहिए। रिश्ते में एक-दूसरे के सपनों का सम्मान करना बहुत महत्वपूर्ण है।''
अभिनेत्री ने कहा, ''परिवार का मतलब एक-दूसरे का साथ देना है, न कि पुरानी सोच के अनुसार भूमिकाएं तय करना। एक अच्छे रिश्ते में दोनों को एक-दूसरे के लिए जगह बनानी चाहिए और मिलकर जीवन की चुनौतियों का सामना करना चाहिए।''
समृद्धि ने अपने किरदार अभिरा के बारे में भी बात की। उन्होंने कहा, ''अभिरा की जिंदगी में भी कई जिम्मेदारियां हैं और वह कई चीजों को संभालने की कोशिश कर रही है। मेरा किरदार उन महिलाओं की भावनाओं को दर्शाता है, जो हर जगह खुद को साबित करने की कोशिश करती हैं।''
उन्होंने कहा, ''वास्तविक जीवन में भी कई महिलाएं घर और काम के बीच संतुलन बनाने की कोशिश करती हैं। उन पर भावनात्मक दबाव होता है, जिसे अक्सर लोग नहीं समझ पाते।''