क्या है 'द ट्रेटर्स सीजन 2' की जीत का राज? क्रिस्टल और रिदा ने खोला खेल का बड़ा राज!
क्रिस्टल और रिदा की जीत की कहानी
मुंबई, 4 सितंबर। 'द ट्रेटर्स सीजन 2' में क्रिस्टल डिसूजा और रिदा थराना ने अपने खेल से दर्शकों को हैरान कर दिया। दोनों ने 'ट्रेटर्स' की भूमिका निभाते हुए न केवल कई प्रतियोगियों को भ्रमित किया, बल्कि अंत तक खुद को बचाते हुए विजेता बनकर बाहर निकलीं। शो खत्म होने के बाद, क्रिस्टल ने साझा किया कि उन्हें शुरुआत से ही यह एहसास था कि अगर वे किसी सवाल पर अधिक सफाई देने लगेंगी, तो उनका राज खुल सकता है।
क्रिस्टल ने अपने अनुभव को साझा करते हुए कहा, "ट्रेटर होना सुनने में भले ही आकर्षक लगे, लेकिन जब आपको उन लोगों से झूठ बोलना पड़े, जिन्हें आप सच में पसंद करते हैं, तब इसकी असली चुनौती समझ में आती है। मैं शुरू से ही ट्रेटर थी, इसलिए मुझे जल्दी समझ आ गया था कि ज्यादा बोलने से या किसी आरोप पर तुरंत सफाई देने से मैं सबकी नजरों में आ सकती हूं।"
उन्होंने आगे कहा, "इसी कारण मैंने यह सीखा कि कब बोलना है, कब चुप रहना है और कब सिर्फ मुस्कुराकर पीछे बैठ जाना है। शो के दौरान मुझ पर शक किया गया, आरोप भी लगे और कई बार अन्य प्रतियोगियों ने मुझे मुश्किल में डालने की कोशिश की, लेकिन मैं हर बार किसी तरह निकल गई।"
जब शो की शुरुआत हुई, तब कुल 21 खिलाड़ी पैलेस में पहुंचे थे। इसके बाद कई हफ्तों तक धोखे, मर्डर और शक का खेल चलता रहा। 'शक के घेरे' के दौरान खिलाड़ी लगातार यह पता लगाने की कोशिश करते रहे कि कौन ट्रेटर है। जैसे-जैसे खेल आगे बढ़ा, खिलाड़ी एक-एक करके बाहर होते गए और अंत में केवल छह खिलाड़ी बचे।
फिनाले तक मल्लिका शेरावत, साहिल सलाथिया, दलीप ताहिल, शालिनी पासी, क्रिस्टल डिसूजा और रिदा थराना ही खेल में बने रहे। सभी को लगा कि उन्होंने पैलेस के सबसे बड़े धोखे को पार कर लिया है। लेकिन फिनाले में क्रिस्टल और रिदा ने खुद को ट्रेटर बताकर पूरे खेल का सबसे बड़ा राज खोल दिया। दोनों की जोड़ी अंततः जीत तक पहुंची।
रिदा थराना ने अपनी जीत पर कहा, "अगर किसी ने मुझे पहले दिन बताया होता कि मैं इस गेम को ट्रेटर के रूप में खत्म करूंगी, तो मैं हंस पड़ती। मैं शुरुआत में एक निर्दोष खिलाड़ी बनकर खेलना चाहती थी, क्योंकि मुझे लगता था कि मैं झूठ नहीं बोल सकती। लेकिन बाद में खेल पूरी तरह बदल गया।"
उन्होंने कहा, "ट्रेटर बनने के बाद मेरे पास फिनाले तक पहुंचने की योजना थी, लेकिन सबसे कठिन हिस्सा उन लोगों के खिलाफ खेलना था, जिनकी मैं सच में परवाह करती थी। मैंने निर्दोष खिलाड़ी के रूप में भी अपना सर्वश्रेष्ठ प्रयास किया और ट्रेटर बनने के बाद भी पूरी ताकत से खेली। मैंने जीत का फैसला किस्मत पर छोड़ दिया। मैं पैलेस में निर्दोष खिलाड़ी बनकर पहुंची, ट्रेटर बनी और अंततः विजेता बनकर बाहर निकली।"