कुशाग्र दुआ का नया सफर: 'बींदणी' में ग्रे शेड किरदार की चुनौती
कुशाग्र दुआ का अनोखा किरदार
मुंबई, 20 फरवरी। टीवी जगत में कुछ किरदार ऐसे होते हैं जो दर्शकों का दिल जीत लेते हैं, जबकि कुछ ऐसे होते हैं जो उन्हें सोचने पर मजबूर कर देते हैं। अभिनेता कुशाग्र दुआ ने सन नियो पर प्रसारित शो 'प्रथाओं की ओढ़े चुनरी: बींदणी' में एक ग्रे शेड किरदार निभाया है। उन्होंने अपनी भूमिका और इंडस्ट्री के बारे में खुलकर चर्चा की।
कुशाग्र ने बताया कि यह शो उनके लिए एक नई यात्रा की तरह है। उन्होंने कहा, "मैं 'गर्व' नाम के लड़के का किरदार निभा रहा हूं, जो अपने रिश्तेदारों के साथ रहता है। गर्व के जीवन में सबसे बड़ा खालीपन उसके माता-पिता का न होना है, जिसने उसे गहरे दर्द और गुस्से से भर दिया है।"
उन्होंने आगे कहा, "यह दर्द गर्व को कठोर बना देता है और वह लड़कियों से नफरत करने लगता है। उसे प्यार पर विश्वास नहीं है और वह उन लड़कों से चिढ़ता है जो प्यार में पड़कर सब कुछ दांव पर लगा देते हैं। उसके लिए प्यार की कुर्बानियां मजबूरी और दिखावा हैं।"
जब कुशाग्र से पूछा गया कि उन्होंने यह शो क्यों चुना, तो उन्होंने कहा, "गर्व का किरदार मेरे लिए बहुत अलग और चुनौतीपूर्ण है। मुझे ऐसे किरदार पसंद हैं जिनमें कई परतें हों। यह कहानी रिश्तों और परंपराओं के टकराव को दर्शाती है और समाज को एक संदेश देने की कोशिश करती है।"
कुशाग्र ने अपने करियर के अनुभव साझा करते हुए कहा, "मेरे लिए नेगेटिव रोल निभाना सबसे कठिन होता है। उदाहरण के लिए, मेरा पुराना शो 'कैंपस डायरीज' काफी चुनौतीपूर्ण था। हर किरदार में मैं अपनी पर्सनैलिटी के कुछ गुण डालता हूं।"
कुछ किरदार ऐसे होते हैं जो शूटिंग के बाद भी कलाकार के मन में रह जाते हैं। इस पर कुशाग्र ने कहा, "किरदार पीछा नहीं करते, लेकिन कुछ आदतें दिमाग में रह जाती हैं।"
स्क्रिप्ट चुनने के बारे में उन्होंने कहा, "मैं वेब सीरीज और फिल्मों में कहानी को प्राथमिकता देता हूं, भले ही मेरा किरदार छोटा हो। टीवी में मैं देखता हूं कि मेरा रोल कितना प्रभावशाली है।"
इंडस्ट्री से जुड़े मिथ पर कुशाग्र ने कहा, "यह एक भ्रम है कि टीवी करने के बाद वेब या फिल्मों में काम करना मुश्किल हो जाता है। कई टीवी कलाकार बड़े पर्दे पर भी शानदार काम कर रहे हैं।"
सोशल मीडिया के बारे में उन्होंने कहा, "आजकल सोशल मीडिया एक्टर का बायोडाटा बन चुका है। हर कोई इंस्टाग्राम देखता है, इसलिए इसे सही तरीके से संभालना एक जिम्मेदारी बन गई है।"