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कमलेश मेटा खनन परियोजना के खिलाफ 12 गांवों का चुनाव बहिष्कार: ग्रामीणों की एकजुटता

पिंडवाड़ा तहसील के 12 गांवों के ग्रामीणों ने कमलेश मेटा कास्ट खनन परियोजना के विरोध में चुनाव बहिष्कार का निर्णय लिया है। उन्होंने स्पष्ट किया है कि जब तक यह परियोजना रद्द नहीं होती, तब तक वे चुनाव प्रक्रिया का बहिष्कार करेंगे। ग्रामीणों ने अपनी मांगों को प्रशासन तक पहुंचाने के लिए कलेक्टर से मिलने का भी निर्णय लिया है। जानें इस आंदोलन की पूरी कहानी और ग्रामीणों की एकजुटता के पीछे का कारण।
 

ग्रामीणों ने लिया बड़ा निर्णय

पिंडवाड़ा तहसील में प्रस्तावित कमलेश मेटा कास्ट खनन परियोजना के खिलाफ 12 गांवों के निवासियों ने एक महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। ग्रामीणों ने पंचायती राज चुनाव में मतदान का बहिष्कार करने का ऐलान किया है। रविवार की शाम को हुई सामूहिक बैठक में, उन्होंने एकजुट होकर यह तय किया कि जब तक यह खनन परियोजना रद्द नहीं होती, तब तक वे चुनाव का विरोध करेंगे। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि उनका आंदोलन केवल आगामी चुनाव तक सीमित नहीं रहेगा। यदि कमलेश मेटा परियोजना को निरस्त नहीं किया गया, तो वे भविष्य में होने वाले सभी पंचायती राज चुनावों का बहिष्कार करेंगे।


12 गांवों की रणनीति

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बैठक में शामिल ग्रामीणों ने खनन परियोजना से संबंधित आपत्तियों और चिंताओं पर चर्चा की। इसके बाद, सर्वसम्मति से चुनाव बहिष्कार का निर्णय लिया गया। उन्होंने कहा कि वे एकजुट होकर चुनाव प्रक्रिया का बहिष्कार करेंगे और यह भी तय किया कि जब तक परियोजना रद्द नहीं होती, तब तक गांवों में आने वाले नेताओं का विरोध किया जाएगा।


विरोध जारी रहेगा

ग्रामीणों ने कहा कि उनका मुख्य मुद्दा कमलेश मेटा कास्ट खनन परियोजना है। जब तक यह परियोजना पूरी तरह से रद्द नहीं होती, तब तक उनका विरोध जारी रहेगा। उन्होंने पहले भी अपनी आपत्तियां संबंधित अधिकारियों के सामने रखी हैं। अब चुनाव बहिष्कार के माध्यम से वे प्रशासन और सरकार तक अपनी मांगें मजबूती से पहुंचाना चाहते हैं। उन्होंने कहा कि लोकतांत्रिक प्रक्रिया में मतदान महत्वपूर्ण है, लेकिन यदि उनकी मांगों पर कार्रवाई नहीं होती है, तो उन्होंने सामूहिक रूप से चुनाव से दूरी बनाने का निर्णय लिया है।


कलेक्टर से मुलाकात

ग्रामीण सोमवार को जिला कलेक्टर से मिलने जा रहे हैं। इस दौरान वे कलेक्टर को ज्ञापन सौंपकर अपनी समस्याओं और मांगों से अवगत कराएंगे। ग्रामीणों की ओर से अब तक हुई जांच, प्रगति और समीक्षा से संबंधित रिपोर्ट भी कलेक्टर के सामने प्रस्तुत की जाएगी। उनका प्रयास रहेगा कि प्रशासन उनकी आपत्तियों पर गंभीरता से विचार करे और परियोजना के संबंध में स्थिति स्पष्ट करे।


नेताओं के प्रवेश का विरोध

बैठक में यह भी निर्णय लिया गया कि जब तक उनकी मांगें पूरी नहीं होतीं, वे क्षेत्र में राजनीतिक नेताओं के प्रवेश का विरोध करेंगे। ग्रामीणों का कहना है कि चुनाव के दौरान नेता वोट मांगने गांवों में आते हैं, लेकिन स्थानीय समस्याओं का स्थायी समाधान नहीं हो रहा है। इसी नाराजगी के चलते उन्होंने चुनाव बहिष्कार के साथ नेताओं के विरोध का भी ऐलान किया है।


प्रशासन के लिए चुनौती

12 गांवों के ग्रामीणों द्वारा चुनाव बहिष्कार की घोषणा के बाद प्रशासन के सामने एक नई चुनौती खड़ी हो गई है। सोमवार को कलेक्टर के साथ होने वाली बैठक महत्वपूर्ण मानी जा रही है। ग्रामीण अपनी मांगों के साथ अब तक की जांच और प्रगति से जुड़ी रिपोर्ट भी अधिकारियों को सौंपेंगे। फिलहाल, ग्रामीणों ने स्पष्ट कर दिया है कि जब तक कमलेश मेटा कास्ट परियोजना रद्द नहीं होती, उनका विरोध जारी रहेगा। प्रशासन की ओर से इस मामले में क्या कदम उठाए जाते हैं, इस पर सभी की नजर रहेगी।