विक्रम भट्ट ने फिल्म इंडस्ट्री के स्टार सिस्टम पर उठाए सवाल, जानें उनकी बेबाक राय
हॉरर सिनेमा के मास्टर विक्रम भट्ट का बड़ा बयान
हॉरर फिल्मों को हिंदी सिनेमा में नई दिशा देने वाले प्रसिद्ध निर्देशक विक्रम भट्ट ने फिल्म इंडस्ट्री के कामकाज और स्टार सिस्टम पर अपनी राय रखी है। उन्होंने कहा कि सफलता और असफलता का मापदंड अक्सर असंतुलित होता है, जहां हिट फिल्मों का श्रेय सितारों को दिया जाता है, जबकि फ्लॉप फिल्मों की जिम्मेदारी डायरेक्टर पर डाल दी जाती है।
‘फ्लॉप फिल्मों की लाश उठाने के पैसे मिलते हैं’
विक्रम भट्ट ने अपने चार दशकों के अनुभव को साझा करते हुए कहा, “हमें फ्लॉप फिल्मों की लाश उठाने के पैसे दिए जाते हैं।” उनके अनुसार, जब कोई फिल्म सफल होती है, तो कलाकारों को सराहा जाता है, लेकिन असफलता के समय सबसे पहले निर्देशक को दोषी ठहराया जाता है।
चार दशकों का अनुभव और करियर की चुनौतियाँ
विक्रम भट्ट ने अपने लंबे करियर में कई हिट फिल्मों का निर्देशन किया है, साथ ही कई फ्लॉप फिल्मों का भी सामना किया है। उन्होंने बड़े सितारों के साथ काम किया और नए कलाकारों को भी अवसर दिया। इस दौरान उन्हें कई व्यक्तिगत विवादों और कठिनाइयों का सामना करना पड़ा। उन्होंने यह भी बताया कि उनके जीवन में कई ऐसे अनुभव रहे हैं जिन्होंने उन्हें मानसिक और पेशेवर रूप से प्रभावित किया।
इंडस्ट्री में टिके रहने का मंत्र
विक्रम भट्ट का मानना है कि फिल्म इंडस्ट्री में लंबे समय तक बने रहने के लिए केवल सफलता ही नहीं, बल्कि अपने सिद्धांतों पर कायम रहना भी आवश्यक है। उनके अनुसार, स्टार सिस्टम और क्रेडिट की राजनीति अक्सर असली क्रिएटिव मेहनत को पीछे धकेल देती है।
स्टार सिस्टम और क्रेडिट पर सवाल
उन्होंने फिल्म इंडस्ट्री के स्टार सिस्टम और क्रेडिट वितरण पर भी सवाल उठाए। उनका कहना है कि कई बार असली मेहनत करने वाले लोग पीछे रह जाते हैं, जबकि सुर्खियां बड़े नामों के हिस्से में चली जाती हैं।
करियर के विवादों पर बेबाक राय
विक्रम भट्ट ने अपने करियर में आए विवादों, संघर्षों और यहां तक कि जेल जाने तक के अनुभवों पर भी खुलकर बात की। उन्होंने यह भी बताया कि क्यों उन्होंने कुछ बड़े सितारों, जैसे आमिर खान, के साथ दोबारा काम नहीं किया।