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नीतीश भारद्वाज: क्या सच में हैं भगवान श्रीकृष्ण का अवतार? जानें इस दिलचस्प कहानी में!

नीतीश भारद्वाज, जो 'महाभारत' में भगवान श्रीकृष्ण का किरदार निभाकर प्रसिद्ध हुए, हाल ही में अपने स्टेज शो 'चक्रव्यूह' में दर्शकों के दिलों को छूने में सफल रहे। एक बुजुर्ग महिला ने उन्हें साक्षात श्री कृष्ण का अवतार बताया, जिससे अभिनेता भावुक हो गए। जानें उनके अनुभव और फैंस की प्रतिक्रिया के बारे में इस दिलचस्प लेख में।
 

नीतीश भारद्वाज का अद्वितीय किरदार


मुंबई, 22 फरवरी। दूरदर्शन के प्रसिद्ध धारावाहिक 'महाभारत' में भगवान श्रीकृष्ण की भूमिका निभाने वाले अभिनेता नीतीश भारद्वाज को कौन नहीं जानता? उनके इस किरदार ने उन्हें हर घर में पहचान दिलाई, और दर्शकों ने उन्हें भगवान श्रीकृष्ण का अवतार मान लिया।


नीतीश द्वारा निभाया गया श्रीकृष्ण का चरित्र आज भी लोगों के दिलों में जीवित है। हाल ही में, एक बुजुर्ग महिला ने उन्हें देखकर कहा कि वह भगवान का अवतार हैं और उन पर ढेर सारा प्यार बरसाया।


हालांकि नीतीश भारद्वाज अब टीवी पर सक्रिय नहीं हैं, लेकिन वह अपने स्टेज शो 'चक्रव्यूह' के माध्यम से थिएटर में छाए हुए हैं। इस शो में वह आज भी श्री कृष्ण बनकर गीता के उपदेश देते हैं। एक परिवार ने जब उन्हें देखा, तो वे भावुक हो गए। बुजुर्ग महिला ने उन्हें साक्षात श्री कृष्ण का अवतार बताया।


अभिनेता ने अपने इंस्टाग्राम पर एक प्यारा सा वीडियो साझा किया, जिसमें व्हीलचेयर पर बैठी महिला कह रही हैं कि उन्होंने महाभारत पढ़ी है, लेकिन नीतीश ने उसे साक्षात कर दिया है। ऐसा लगता है जैसे स्वयं प्रभु उपदेश दे रहे हैं।


महिला ने नीतीश की अदाकारी की भी प्रशंसा की। अभिनेता भी इस प्यारे परिवार से मिलकर बेहद खुश हैं। उनका मानना है कि वह केवल भगवान का एक छोटा सा माध्यम हैं, जो उनके संदेशों को लोगों तक पहुंचाते हैं।


वीडियो के साथ उन्होंने लिखा, "मुंबई में चक्रव्यूह के बाद के ऐसे पल मेरे दिल में हमेशा रहेंगे। वरिष्ठ नागरिकों को प्रणाम करते हुए मुझे अपने माता-पिता की याद आती है। मैं उनके द्वारा दिए गए शुद्ध प्रेम और आशीर्वाद को विनम्रता से स्वीकार करता हूं। मेरे भीतर जो भी प्रेरणा और शक्ति है, वह कृष्ण से ही आती है। मैं भाग्यशाली हूं कि उन्होंने मुझे अपना माध्यम चुना।"


1988 में बीआर चोपड़ा की महाभारत एक अत्यंत लोकप्रिय धार्मिक शो था। इसकी प्रसिद्धि केवल भारत में ही नहीं, बल्कि विदेशों में भी फैली थी। 9 करोड़ के बजट में बनी इस महाभारत को देखने का इतना क्रेज था कि जब इसका प्रसारण होता था, तो सड़कें सुनसान हो जाती थीं और लोग एक घंटे के लिए अपने सारे काम छोड़कर इसे देखने में जुट जाते थे।