क्या थलपति विजय की 'जन नायकन' का भविष्य अधर में लटक गया? जानें सुप्रीम कोर्ट के ताजा फैसले के बारे में!
फिल्म 'जन नायकन' में कानूनी विवाद
नई दिल्ली, 12 जनवरी। साउथ के मशहूर अभिनेता थलपति विजय की फिल्म 'जन नायकन' इन दिनों चर्चा का विषय बनी हुई है। इसे उनके करियर का अंतिम बड़ा प्रोजेक्ट माना जा रहा है, लेकिन इस फिल्म को लेकर कानूनी समस्याएं बढ़ती जा रही हैं। फिल्म की रिलीज पहले ही कई बार टल चुकी है, और अब यह मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच चुका है।
पिछले हफ्ते मद्रास हाईकोर्ट ने फिल्म को यूए सर्टिफिकेट जारी करने का आदेश दिया था। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड (सीबीएफसी) के चेयरपर्सन को फिल्म को रिवाइजिंग कमेटी के पास भेजने का अधिकार नहीं था।
कोर्ट ने कहा कि जब चेयरपर्सन ने सिफारिश की थी कि सर्टिफिकेट में कटौती के बाद जारी किया जाएगा, तब उनका यह अधिकार समाप्त हो गया था। इसके बाद निर्माताओं ने सर्टिफिकेट जारी करने के लिए अदालत का दरवाजा खटखटाया।
हालांकि, मद्रास हाईकोर्ट के इस निर्णय को चुनौती देते हुए मामला अब सुप्रीम कोर्ट में पहुंच गया है। उच्चतम न्यायालय में इस चुनौती का मुख्य तर्क यह है कि फिल्म की रिलीज से पहले सभी प्रक्रियाओं का पालन होना चाहिए और किसी भी सर्टिफिकेट के जारी करने या रोकने के निर्णय की समीक्षा की संभावना बनी रहनी चाहिए। सुप्रीम कोर्ट ने अभी तक मामले की सुनवाई के लिए कोई तारीख निर्धारित नहीं की है, जिससे फिल्म की रिलीज को लेकर अनिश्चितता बढ़ गई है।
'जन नायकन' का निर्माण केवीएन प्रोडक्शंस ने किया है और इसका निर्देशन एच. विनोथ ने किया है। इस फिल्म में थलपति विजय के साथ पूजा हेगड़े और ममिता बैजू भी मुख्य भूमिकाओं में हैं। निर्माताओं ने बताया कि फिल्म को 22 देशों में चार भाषाओं में रिलीज करने की योजना है। इसकी एडवांस बुकिंग पहले ही शुरू हो चुकी है और दर्शकों में इसके प्रति उत्साह और मांग बहुत अधिक है।
फिल्म का सर्टिफिकेशन विवाद तब शुरू हुआ जब सीबीएफसी के एक सदस्य ने चेयरपर्सन को शिकायत भेजी। शिकायत में कहा गया कि फिल्म को यूए सर्टिफिकेट देने से पहले उनकी आपत्तियों पर ध्यान नहीं दिया गया। इसके बाद फिल्म रिवाइजिंग कमेटी के पास चली गई, जिससे रिलीज में बार-बार देरी हुई। निर्माताओं ने अदालत में तर्क दिया कि फिल्म अभी तक किसी तीसरे पक्ष को नहीं दिखाई गई है और केवल शिकायत के आधार पर सर्टिफिकेट रोकना अनुचित है।
मद्रास हाईकोर्ट ने पहले फिल्म के लिए यूए सर्टिफिकेट जारी करने का आदेश दिया था, लेकिन सुप्रीम कोर्ट में चुनौती ने इस प्रक्रिया में नई बाधा डाल दी है। निर्माताओं का कहना है कि किसी भी देरी से न केवल उनकी योजनाओं पर असर पड़ेगा बल्कि दर्शकों की उत्सुकता भी प्रभावित होगी। निर्माता और कलाकार मानते हैं कि फिल्म में केवल मामूली कट्स की सिफारिश की गई थी, जिन्हें पूरा कर लिया गया है, और अब इसे रिलीज करना उचित है।