क्या 'दिलवाली दिवाली' है इस दिवाली की सबसे खास फिल्म? जानें इसकी कहानी और रिव्यू!
दिवाली का जश्न OTT पर: 'दिलवाली दिवाली' का आगाज़
दिवाली का त्योहार अब अपने पूरे रंग में है, और यह उत्सव अब OTT प्लेटफॉर्म पर भी देखने को मिल रहा है। हाल ही में रिलीज हुई फिल्म 'मीठे में क्या है' के बाद, अब एक और पारिवारिक फिल्म 'दिलवाली दिवाली' दर्शकों के सामने आई है। यह फिल्म रितेश मेनन के निर्देशन में Netflix पर उपलब्ध है।
फिल्म की कहानी: परिवार और रिश्तों की अहमियत
इस फिल्म की कहानी अंश सिक्का (मिहिर आहूजा) के इर्द-गिर्द घूमती है, जो नॉर्वे में नौकरी करता है। वह अपने माता-पिता सुधीर (मनोज पाहवा) और सुखमनी (नीलू कोहली) को बेहतर जीवन देने के लिए एक शानदार अपार्टमेंट खरीदता है।
हालांकि, माता-पिता को अपने पुराने घर और पड़ोसियों से गहरा लगाव है। नए अपार्टमेंट की चमक-दमक के बावजूद, उन्हें अपने पुराने रिश्तों की कमी महसूस होती है। अंश के दिवाली पर घर लौटने पर, माता-पिता के लिए सच्चाई छिपाना मुश्किल हो जाता है।
फिल्म में अंश की आर्थिक परेशानियों का भी जिक्र है, जिससे परिवार के सभी सदस्यों के राज और समस्याएं उजागर होती हैं। यह फिल्म रिश्तों, उम्मीदों और परिवार की भावनाओं को दर्शाने का प्रयास करती है।
फिल्म का रिव्यू: विचार अच्छा, लेकिन समय की कमी
'दिलवाली दिवाली' का सबसे बड़ा सकारात्मक पहलू इसका विचार है। यह फिल्म उस मुद्दे को उठाती है, जिसे अक्सर परिवारों में नजरअंदाज किया जाता है। कई बार बच्चे अपने माता-पिता को बेहतर सुविधाएं देने के लिए बड़े शहरों में ले जाना चाहते हैं, लेकिन यह भूल जाते हैं कि असली खुशी क्या है।
हालांकि, रितेश मेनन की यह फिल्म अपने अच्छे विचार को प्रभावशाली तरीके से नहीं पेश कर पाती। इसकी सबसे बड़ी कमी इसकी छोटी अवधि है, जो लगभग 61 मिनट है। इस कम समय में कई भावनात्मक पहलुओं को ठीक से विकसित नहीं किया जा सका है।
अभिनय की बात: मनोज पाहवा और नीलू कोहली का जादू
अभिनय के मामले में मनोज पाहवा फिल्म की जान हैं। उनकी कॉमिक टाइमिंग और सहजता कहानी में हल्कापन लाती है। नीलू कोहली ने सुखमनी के किरदार को स्वाभाविकता से निभाया है, जो दर्शकों को भावनात्मक रूप से जोड़ता है।
मिहिर आहूजा भी अंश के किरदार में ठीक हैं, लेकिन उनके भावनात्मक पक्ष को और बेहतर तरीके से दिखाया जा सकता था। फिल्म में अंश की बहन का किरदार निभाने वाली औरा भटनागर को ज्यादा स्क्रीन टाइम नहीं मिला है।
क्या देखें या नहीं: 'दिलवाली दिवाली' का सार
कुल मिलाकर, 'दिलवाली दिवाली' एक अच्छी सोच और पारिवारिक संदेश वाली हल्की-फुल्की फिल्म है। यह दर्शकों को याद दिलाती है कि माता-पिता को खुश रखने के लिए सिर्फ बड़ा घर और महंगी सुविधाएं देना काफी नहीं है।
फिल्म की कहानी और संदेश अच्छे हैं, लेकिन इसकी छोटी अवधि और जल्दबाजी में आगे बढ़ती पटकथा इसकी प्रभावशीलता को कम कर देती है। यदि आप दिवाली के मौके पर परिवार के साथ कोई हल्की-फुल्की फिल्म देखना चाहते हैं, तो Netflix पर 'दिलवाली दिवाली' को देख सकते हैं।