क्या ओटीटी कंटेंट पर लगेगा नया सेंसर बोर्ड? RSS ने बनाई समीक्षा समिति
ओटीटी प्लेटफॉर्म पर कंटेंट की समीक्षा की आवश्यकता
ओटीटी प्लेटफॉर्म पर प्रसारित होने वाले कंटेंट के बारे में चर्चा अब और भी बढ़ गई है। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) ने ओटीटी सामग्री की समीक्षा के लिए एक पैनल का गठन किया है। यह पैनल यह विचार करेगा कि कैसे अश्लीलता, भारतीय संस्कृति के खिलाफ सामग्री, कथित एंटी-नेशनल कंटेंट और बच्चों तथा युवाओं पर नकारात्मक प्रभाव डालने वाली सामग्री को नियंत्रित किया जा सकता है।
बच्चों और युवाओं पर प्रभाव की चिंता
बच्चों और युवाओं पर असर को लेकर चिंता
संघ के सदस्यों का कहना है कि ओटीटी प्लेटफॉर्म पर कंटेंट का दायरा तेजी से बढ़ा है। फिल्मों और टेलीविजन की तुलना में ओटीटी पर कंटेंट को लेकर अधिक स्वतंत्रता देखने को मिलती है। इस कारण कुछ कार्यक्रमों में हिंसक, अश्लील या आपत्तिजनक दृश्यों को लेकर सवाल उठते रहे हैं। RSS का मानना है कि इस प्रकार की सामग्री का बच्चों और युवाओं पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है। संघ इस मुद्दे को भारतीय संस्कृति, सामाजिक मूल्यों और पारिवारिक ढांचे से भी जोड़कर देखता है। इसलिए ओटीटी कंटेंट के लिए सख्त नियमों की आवश्यकता पर चर्चा की जा रही है।
सेंसर बोर्ड की स्थापना की आवश्यकता
फिलहाल नहीं बना कोई सेंसर बोर्ड
हालांकि, इस संदर्भ में एक महत्वपूर्ण बात यह है कि RSS ने अभी तक कोई आधिकारिक सेंसर बोर्ड स्थापित नहीं किया है। वर्तमान में संघ ने एक पैनल का गठन किया है, जिसका कार्य ओटीटी कंटेंट से संबंधित मुद्दों का अध्ययन करना और संभावित नियमों के लिए सुझाव देना है। पैनल की सिफारिशों के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि संघ आगे किस प्रकार की व्यवस्था की मांग करता है। इसलिए, यह कहना उचित नहीं होगा कि ओटीटी प्लेटफॉर्म के लिए कोई नया सेंसर बोर्ड अस्तित्व में आ गया है।
फिल्मों की तरह ओटीटी कंटेंट की जांच की मांग
फिल्मों की तरह OTT कंटेंट की जांच की मांग
संघ से जुड़े व्यक्तियों ने ओटीटी के लिए फिल्मों की सेंसर व्यवस्था जैसी प्रणाली बनाने की मांग की है। यदि भविष्य में ऐसी व्यवस्था लागू होती है, तो ओटीटी प्लेटफॉर्म पर रिलीज होने से पहले कंटेंट की समीक्षा और सर्टिफिकेशन की प्रक्रिया हो सकती है। इसका अर्थ यह होगा कि वेब सीरीज, फिल्म या अन्य डिजिटल कार्यक्रमों को रिलीज से पहले निर्धारित मानकों के अनुसार जांच से गुजरना होगा। हालांकि, ऐसी व्यवस्था को लागू करने के लिए सरकार और संबंधित नियामक संस्थाओं की भूमिका भी महत्वपूर्ण होगी।
मोहन भागवत की चिंताएं
मोहन भागवत पहले भी उठा चुके हैं मुद्दा
RSS प्रमुख मोहन भागवत ने भी पहले ओटीटी और डिजिटल प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध कंटेंट के बारे में चिंता व्यक्त की है। संघ लंबे समय से डिजिटल माध्यमों पर बच्चों और युवाओं के लिए उपलब्ध सामग्री और उसके सामाजिक प्रभाव पर चर्चा करता रहा है। अब बनाए गए पैनल के माध्यम से इस मुद्दे पर सुझाव जुटाए जाएंगे। पैनल की रिपोर्ट और सिफारिशों के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि RSS ओटीटी कंटेंट के लिए किस प्रकार के नियम या निगरानी व्यवस्था की मांग करता है। फिलहाल ओटीटी प्लेटफॉर्म पर सेंसर बोर्ड जैसी कोई नई व्यवस्था लागू नहीं हुई है।