‘द लास्ट कलर’ की प्रेरणा: विकास खन्ना ने होली पर साझा किया दिलचस्प किस्सा
फिल्म की यात्रा की शुरुआत
मुंबई, 3 मार्च। लेखक और निर्देशक विकास खन्ना ने अपने इंस्टाग्राम पर एक पोस्ट के माध्यम से बताया कि उनकी फिल्म ‘द लास्ट कलर’ की यात्रा 2011 में होली के दिन वृंदावन से शुरू हुई थी। उस दिन, रंगों के इस उत्सव के बीच, उन्होंने विधवाओं को सफेद कपड़ों में चुपचाप बैठे देखा, जो उनके लिए एक गहरी सोच का विषय बन गया।
विकास ने कहा कि जबकि चारों ओर रंग-बिरंगी दुनिया थी, इन महिलाओं के पास एक भी रंग नहीं था। इस दृश्य ने उनके दिल को छू लिया और उन्होंने उसी समय एक छोटी सी कहानी लिखी, जो बाद में उपन्यास और फिर फिल्म में तब्दील हो गई।
उन्होंने बताया कि यह फिल्म उनकी कल्पना से कहीं अधिक सफल रही। इसका पहला लुक कान्स फिल्म फेस्टिवल में पेश किया गया और इसके बाद इसे लगभग 100 अंतरराष्ट्रीय फिल्म समारोहों में प्रदर्शित किया गया। यूनाइटेड नेशंस हेडक्वार्टर में विशेष स्क्रीनिंग के दौरान उन्हें खड़े होकर सराहा गया। इसके अलावा, उन्हें यूएस कैपिटल, वाशिंगटन डीसी में विधवाओं के लिए रोजगार और सम्मान की वकालत करने का निमंत्रण मिला।
फिल्म को 2020 के एकेडमी अवॉर्ड्स के लिए योग्य घोषित किया गया और यह अमेजन प्राइम वीडियो पर स्ट्रीम हुई। लेकिन विकास खन्ना के लिए सबसे बड़ी उपलब्धि यह थी कि उन्होंने सीखा कि त्योहारों से लोगों को जोड़ने की शक्ति कितनी महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा, “रंग, खुशी और उत्सव से किसी को जोड़ना सबसे आवश्यक है। हर किसी को इसका हक है।”
इस विश्वास ने उनकी पहल ‘बंगलो’ की नींव रखी, जहां कोई भी उत्सव तब तक अधूरा माना जाता है जब तक हर व्यक्ति टेबल पर न बैठ जाए। आज भले ही वह शारीरिक रूप से दुबई में हों, लेकिन उनकी आत्मा वृंदावन में है, जहां हर मुट्ठी में गुलाल है और उन विधवाओं के लिए शुभकामनाएं हैं जो अंततः रंग पहनने में सफल हुईं।