‘द नर्मदा स्टोरी’: एक आदिवासी महिला की न्याय की खोज की कहानी
फिल्म का सारांश और सामाजिक संदेश
मुंबई, 29 मई। मध्य प्रदेश की पृष्ठभूमि पर आधारित आगामी क्राइम-ड्रामा फिल्म ‘द नर्मदा स्टोरी’ भ्रष्टाचार, सामाजिक अन्याय और एक आदिवासी महिला के संघर्ष की कहानी को दर्शाती है। यह फिल्म दिखाती है कि कैसे एक आदिवासी महिला न्याय की तलाश में निकलती है और व्यवस्था की कड़वी सच्चाइयों का सामना करती है। फिल्म की टीम में इश्तियाक खान, आईपीएस अधिकारी और अभिनेत्री सिमाला प्रसाद, अभिनेता मुकेश तिवारी, और निर्देशक जैगम इमाम शामिल हैं, जिन्होंने फिल्म के विषय और सामाजिक संदेश पर चर्चा की।
निर्देशक जैगम इमाम ने बताया कि यह फिल्म किसी एक सच्ची घटना पर आधारित नहीं है, बल्कि कई घटनाओं और समाचारों का समावेश है। फिल्म में आदिवासी महिला अग्नि धुर्वे और उसकी बेटी की कहानी को भावनात्मक रूप से प्रस्तुत किया गया है।
अश्विनी कालसेकर ने अग्नि का किरदार निभाया है, जो दर्शकों को उसकी यात्रा के दौरान भावनात्मक रूप से जोड़ता है। मुकेश तिवारी ने पुलिस अधिकारी की भूमिका निभाई है, जिसमें उन्होंने अपने किरदार में हल्की कॉमेडी का तड़का लगाया है।
आईपीएस अधिकारी सिमाला प्रसाद ने बताया कि उनके किरदार का संघर्ष उनकी असल जिंदगी से काफी अलग है, लेकिन यह दर्शाता है कि महिला पुलिसकर्मियों को किस तरह की चुनौतियों का सामना करना पड़ता है।
इश्तियाक खान का किरदार रहस्यमय है, जो अपने अतीत के दर्द को छुपाए हुए है। मुकेश तिवारी ने बताया कि फिल्म में सिस्टम को असली विलेन नहीं दिखाया गया, बल्कि यह दर्शाता है कि अपराध कैसे समाज और व्यवस्था की परतों से जन्म लेता है।
निर्देशक ने कहा कि फिल्म में मनोरंजन और जिम्मेदारी का संतुलन बनाना चुनौतीपूर्ण था, लेकिन उन्होंने इसे हल्के हास्य और दिलचस्प किरदारों के माध्यम से संभव बनाया है।
जैगम इमाम ने यह भी कहा कि फिल्म युवाओं के लिए एक नया दृष्टिकोण लाएगी, जिसमें मनोरंजन के साथ-साथ महत्वपूर्ण संदेश भी शामिल हैं।