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वी. शांताराम की बायोपिक: सिद्धांत चतुर्वेदी निभाएंगे दिग्गज फिल्मकार का किरदार!

वी. शांताराम की बायोपिक में अभिनेता सिद्धांत चतुर्वेदी उनके किरदार को निभाएंगे। इस फिल्म का उद्देश्य नई पीढ़ी को वी. शांताराम के योगदान से अवगत कराना है। 18 नवंबर 2026 को उनकी 125वीं जयंती पर फिल्म रिलीज होने की योजना है। जानें इस दिग्गज फिल्मकार के बारे में और उनकी क्लासिक फिल्मों के योगदान के बारे में।
 

वी. शांताराम की जीवनी पर बन रही फिल्म


मुंबई, 13 मार्च। भारतीय सिनेमा के इतिहास में कई महान कलाकार और फिल्म निर्माता ऐसे हैं, जिन्होंने अपनी मेहनत और रचनात्मकता से इस क्षेत्र को नई दिशा दी। इनमें से एक प्रमुख नाम हैं दिग्गज फिल्मकार वी. शांताराम। उनकी जिंदगी और संघर्ष पर आधारित एक बायोपिक का निर्माण किया जा रहा है, जिसमें अभिनेता सिद्धांत चतुर्वेदी उनके किरदार को जीवंत करेंगे।


हाल ही में एक विशेष कार्यक्रम में, वी. शांताराम के बेटे किरण शांताराम ने सिद्धांत को सम्मानित किया और बायोपिक के लिए उन्हें उपयुक्त अभिनेता बताया।


किरण शांताराम ने दर्शकों को संबोधित करते हुए कहा, ''मेरे पिता की जिंदगी पर फिल्म बनाना एक भावनात्मक और गर्व का विषय है। इससे नई पीढ़ी को यह समझने का अवसर मिलेगा कि वी. शांताराम ने भारतीय सिनेमा को कैसे आकार दिया। मुझे पूरा विश्वास है कि सिद्धांत चतुर्वेदी इस किरदार के लिए एकदम सही हैं।''


उन्होंने यह भी बताया कि यह फिल्म एक विशेष अवसर पर रिलीज की जाएगी।


दरअसल, 18 नवंबर 2026 को वी. शांताराम की 125वीं जयंती मनाई जाएगी, और उसी दिन इस बायोपिक को दर्शकों के सामने लाने की योजना है।


किरण ने कहा, ''यह फिल्म भारतीय सिनेमा के इतिहास को याद करने और उस विरासत को सम्मान देने का प्रयास है। मेरे पिता ने उस समय में फिल्मों में प्रयोग किए, जब सिनेमा अपनी प्रारंभिक अवस्था में था। मूक फिल्मों से लेकर बोलती और रंगीन फिल्मों के दौर तक, उन्होंने हर समय नई तकनीक और कहानियों के साथ काम किया।''


वी. शांताराम को भारतीय सिनेमा का एक दूरदर्शी फिल्मकार माना जाता है। उन्होंने कई ऐसी फिल्में बनाई हैं, जो आज भी क्लासिक मानी जाती हैं। उनकी फिल्मों में सामाजिक मुद्दों, संगीत और कला का अनोखा संगम देखने को मिलता है। उनकी प्रसिद्ध कृतियों में 'दो आंखें बारह हाथ', 'नवरंग' और 'झनक झनक पायल बाजे' शामिल हैं। इन फिल्मों ने न केवल दर्शकों का मनोरंजन किया, बल्कि समाज में बदलाव का संदेश भी दिया। यही कारण है कि वी. शांताराम को भारतीय सिनेमा के सबसे प्रभावशाली और प्रयोगधर्मी फिल्मकारों में गिना जाता है।