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मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने स्वामीनारायण मंदिर में की प्रार्थना, जानें क्या है खास

महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने मुंबई के दादर स्थित बीएपीएस स्वामीनारायण मंदिर में पूजा-अर्चना की। इस दौरान उन्होंने समाज के लिए सुख-समृद्धि की प्रार्थना की और मंदिर की गतिविधियों की सराहना की। जानें इस दौरे की खास बातें और स्वामीनारायण संप्रदाय के महत्व के बारे में।
 

मुख्यमंत्री का मंदिर दौरा




मुंबई, 16 अप्रैल। महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने मुंबई के दादर में स्थित प्रसिद्ध बीएपीएस स्वामीनारायण मंदिर में जाकर पूजा-अर्चना की। उनका स्वागत बीएपीएस के साधु तीर्थस्वरूपदास स्वामी ने किया, जिन्होंने उन्हें संस्था की भारत और विश्वभर में चल रही आध्यात्मिक, सांस्कृतिक और मानवता सेवा गतिविधियों के बारे में जानकारी दी।


सीएम फडणवीस ने इस दौरे की तस्वीरें अपने आधिकारिक एक्स प्लेटफॉर्म पर साझा कीं।


इन तस्वीरों में, मुख्यमंत्री मंदिर परिसर में भगवान के दर्शन करते हुए नजर आ रहे हैं। एक तस्वीर में वह गर्भगृह के सामने खड़े होकर प्रार्थना कर रहे हैं, जबकि दूसरी में धार्मिक अनुष्ठान के दौरान अभिषेक करते दिखाई दे रहे हैं। अन्य तस्वीरों में वह मंदिर परिसर में समय बिताते हुए वहां के शांत और दिव्य वातावरण का अनुभव करते दिख रहे हैं। उनके साथ भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) मुंबई के अध्यक्ष और विधायक अमित साटम भी मौजूद थे।


अपने पोस्ट के कैप्शन में, मुख्यमंत्री ने लिखा, 'बीएपीएस श्री स्वामीनारायण मंदिर में दर्शन किए और अभिषेक कर आशीर्वाद प्राप्त किया। सभी की सुख-समृद्धि के लिए प्रार्थना की।'


मुख्यमंत्री ने बीएपीएस द्वारा समाज में सेवा, संस्कार और एकता के लिए किए जा रहे प्रयासों की सराहना की और कहा कि इस तरह की पहल समाज को सकारात्मक दिशा में आगे बढ़ाती है।


दादर का यह बीएपीएस स्वामीनारायण मंदिर मुंबई के प्रमुख धार्मिक स्थलों में से एक है। यह मंदिर स्वामीनारायण संप्रदाय की शिक्षाओं और परंपराओं का प्रतीक है, जहां प्रतिदिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु दर्शन के लिए आते हैं।


भगवान स्वामीनारायण को हिंदू धर्म के एक महान संत और आध्यात्मिक गुरु माना जाता है। उन्होंने लोगों को सरल और अच्छे जीवन जीने का मार्ग दिखाया। उनका जन्म 3 अप्रैल 1781 को अयोध्या में हुआ था और बचपन में उनका नाम घनश्याम था। उन्होंने कम उम्र में ही घर छोड़ दिया और देशभर में भ्रमण कर लोगों को धर्म, सच्चाई और अच्छे व्यवहार की शिक्षा दी।


स्वामीनारायण ने लोगों को नशा छोड़ने, हिंसा से दूर रहने और एक-दूसरे के प्रति प्रेम और सम्मान से रहने की शिक्षा दी। उस समय समाज में कई बुरी प्रथाएं थीं, जिन्हें समाप्त करने के लिए उन्होंने प्रयास किए। गुजरात पहुंचकर, उन्होंने स्वामीनारायण संप्रदाय की स्थापना की, जिससे लाखों लोग जुड़े। उनके सेवाभाव के कारण ही लोग उन्हें भगवान मानने लगे। स्वामीनारायण संप्रदाय में कई गुरु हुए, जिन्होंने भगवान स्वामीनारायण की आध्यात्मिक विरासत को आगे बढ़ाया।