बीआर चोपड़ा: हिंदी सिनेमा के महानायक की पुण्यतिथि पर जानें उनकी अनकही कहानियाँ
बीआर चोपड़ा का योगदान
हिंदी फिल्म उद्योग में बीआर चोपड़ा का नाम एक प्रतिष्ठित स्थान रखता है। उन्होंने अपने करियर में कई महत्वपूर्ण फिल्मों का निर्देशन और निर्माण किया, लेकिन उन्हें सबसे अधिक पहचान टीवी धारावाहिक ‘महाभारत’ से मिली। आज, 4 नवंबर को उनकी 18वीं पुण्यतिथि है। इस अवसर पर आइए उनकी जिंदगी और फिल्मी सफर के कुछ रोचक पहलुओं पर नजर डालते हैं।
पत्रकारिता से फिल्म निर्माण तक
पत्रकारिता में करियर की शुरुआत
बीआर चोपड़ा का असली नाम बलदेव राज चोपड़ा था। उनका जन्म 22 अप्रैल 1914 को लाहौर में हुआ। उन्होंने अंग्रेजी साहित्य में एमए किया और फिल्मों में आने से पहले पत्रकारिता में काम किया। 1944 से 1947 तक उन्होंने ‘सिने हेराल्ड’ पत्रिका में फिल्म पत्रकार के रूप में कार्यरत रहे। इस दौरान उनका सिनेमा के प्रति रुझान बढ़ा और उन्होंने फिल्म निर्माण में कदम रखा।
पहली फिल्म की असफलता
पहली फिल्म से मिली निराशा
भारत-पाकिस्तान विभाजन के समय बीआर चोपड़ा एक फिल्म पर काम कर रहे थे, लेकिन सांप्रदायिक दंगों के कारण वह फिल्म पूरी नहीं हो सकी। इसके बाद उनका परिवार दिल्ली आ गया और बाद में वे मुंबई पहुंचे। वहां उन्होंने 1948 में फिल्म ‘करवट’ बनाई, लेकिन यह फिल्म बॉक्स ऑफिस पर सफल नहीं रही। पहली फिल्म की असफलता ने उन्हें निराश किया, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी।
बॉलीवुड में पहचान
बड़ी सफलताएँ
बीआर चोपड़ा को बतौर निर्देशक पहली बड़ी सफलता 1951 में फिल्म ‘अफसाना’ से मिली। इसके बाद उन्होंने कई सफल फिल्में बनाई जैसे ‘नया दौर’, ‘साधना’, ‘कानून’, ‘गुमराह’, ‘हमराज’, ‘पति पत्नी और वो’, ‘निकाह’, ‘इंसाफ का तराजू’, ‘एक ही रास्ता’ और ‘अवाम’ जैसी फिल्मों के माध्यम से उन्होंने हिंदी सिनेमा में अपनी विशेष पहचान बनाई।
महाभारत का प्रभाव
‘महाभारत’ ने उन्हें घर-घर में पहचान दिलाई
बड़े पर्दे पर सफलता के बाद, बीआर चोपड़ा ने टेलीविजन में भी कदम रखा। 1988 में उनके द्वारा निर्मित ऐतिहासिक धारावाहिक ‘महाभारत’ प्रसारित हुआ, जिसे उनके बेटे रवि चोपड़ा ने निर्देशित किया। इस धारावाहिक को दर्शकों का अपार प्यार मिला और इसके पात्र हर घर में मशहूर हो गए। उस समय इस धारावाहिक के निर्माण पर लगभग 9 करोड़ रुपये खर्च किए गए थे।
अलविदा बीआर चोपड़ा
94 साल की उम्र में उन्होंने दुनिया को कहा अलविदा
बीआर चोपड़ा ने अपने लंबे करियर में हिंदी सिनेमा को कई यादगार फिल्में और एक ऐतिहासिक धारावाहिक दिया। 4 नवंबर 2008 को 94 साल की उम्र में उनका निधन हो गया। भले ही वह आज हमारे बीच नहीं हैं, लेकिन उनकी बनाई फिल्में और ‘महाभारत’ आज भी दर्शकों के दिलों में उनकी यादें ताजा रखते हैं।