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फैयाज खां: भारतीय शास्त्रीय संगीत के बेताज बादशाह की अनकही कहानी

फैयाज खां, भारतीय शास्त्रीय संगीत के एक अद्वितीय गायक, जिन्होंने ध्रुपद और ख्याल शैलियों में अपनी पहचान बनाई। उनका जन्म 1886 में हुआ और उन्होंने अपने जीवन में कई पुरस्कार प्राप्त किए। उनके संगीत में गहराई और सुरीलापन था, जो आज भी संगीत प्रेमियों को प्रेरित करता है। जानें उनके जीवन की अनकही कहानियों और उनके योगदान के बारे में।
 

फैयाज खां का संगीत सफर




मुंबई, 4 नवंबर। भारतीय शास्त्रीय संगीत की समृद्ध परंपरा हजारों साल पुरानी है, जिसकी जड़ें वेदों, खासकर सामवेद में पाई जाती हैं। यह कला की सबसे प्राचीन परंपराओं में से एक मानी जाती है। कई महान गायकों ने इसे वैश्विक स्तर पर पहचान दिलाई है, जिनमें से एक प्रमुख नाम फैयाज खां का है।


फैयाज खां, जो 20वीं सदी में हिंदुस्तानी शास्त्रीय संगीत की ध्रुपद और ख्याल शैलियों के उत्कृष्ट गायक माने जाते थे, का जन्म 8 फरवरी 1886 को उत्तर प्रदेश के आगरा के निकट सिकंदरा में एक संगीतकार परिवार में हुआ। उन्हें 'आफताब-ए-मौसिकी' के नाम से भी जाना जाता था।


उनके जन्म से पहले ही उनके पिता सफदर हुसैन खां का निधन हो गया था, जिसके बाद उनका पालन-पोषण और संगीत की प्रारंभिक शिक्षा उनके नाना ने दी। 25 वर्ष की आयु तक उनके नाना ही उनके गुरु रहे।


फैयाज खां का कद लंबा और शरीर मजबूत था। जब वे मंच पर आते, तो एक पहलवान की तरह नजर आते थे। वे अक्सर शेरवानी और साफा पहनते थे, और उनकी बड़ी मूंछें भी थीं। लेकिन उनकी आवाज, जो गहरी और सुरीली थी, सुनने वालों को मंत्रमुग्ध कर देती थी।


उनके वैवाहिक जीवन की बात करें, तो उनकी पहली पत्नी का निधन शादी के कुछ समय बाद ही हो गया था। इसके बाद उन्होंने दोबारा शादी नहीं की और जीवनभर निःसंतान रहे। वे अपने रचनात्मक कार्यों में 'प्रेम प्रिया' उपनाम का उपयोग करते थे।


फैयाज खां लंबे समय तक बड़ौदा के महाराजा सयाजीराव गायकवाड़ तृतीय के दरबार में राजगायक रहे। इस दौरान उन्हें बड़ौदा दरबार से 'ज्ञान रत्न' की उपाधि मिली, और मैसूर के महाराजा ने उन्हें 'आफताब-ए-मौसिकी' से भी सम्मानित किया।


5 नवंबर 1950 को बड़ौदा में उनका निधन हुआ, लेकिन भारतीय शास्त्रीय संगीत में उनके योगदान को हमेशा याद किया जाएगा। फैयाज खां केवल एक महान गायक नहीं थे, बल्कि एक उत्कृष्ट शिक्षक भी थे, जिन्होंने संगीत की दुनिया में एक अमिट छाप छोड़ी।