नुसरत फतेह अली खान की अनोखी रिक्वेस्ट: 'आप फिल्म देखिए, मैं आपकी आंखों में देखकर गाऊंगा'
शेखर कपूर की यादें: 'बैंडिट क्वीन' के बैकग्राउंड स्कोर की कहानी
मुंबई, 2 नवंबर। प्रसिद्ध फिल्म निर्देशक शेखर कपूर ने अपनी मशहूर फिल्म 'बैंडिट क्वीन' से जुड़ी एक दिलचस्प घटना साझा की है। उन्होंने बताया कि फिल्म के बैकग्राउंड स्कोर की रिकॉर्डिंग के दौरान, पाकिस्तानी गायक नुसरत फतेह अली खान की आवाज में गहरा दर्द और आंसू था, जो कि संगीतकार आरडी बर्मन के निधन के कारण था। नुसरत, आरडी बर्मन के बड़े प्रशंसक थे और उनके निधन से बेहद दुखी थे।
शेखर कपूर ने इंस्टाग्राम पर इस घटना को साझा करते हुए कहा, “जब 'बैंडिट क्वीन' के बैकग्राउंड स्कोर की रिकॉर्डिंग चल रही थी, नुसरत फतेह अली खान ने मुझसे कहा, ‘शेखर जी, आप अपनी फिल्म देखिए और मैं आपकी आंखों में देखकर गाऊंगा।’ यह मेरे लिए एक अनोखी रिक्वेस्ट थी।”
उन्होंने आगे बताया, “जिस सीन के लिए रिकॉर्डिंग हो रही थी, वह बेहमई नरसंहार के बाद का था। इस सीन में चिताएं और नदी किनारे महिलाओं के विलाप की आवाजें थीं। जब रिकॉर्डिंग शुरू हुई, मैंने देखा कि नुसरत मेरी आंखों में देख रहे थे, जैसे वे कुछ खोज रहे हों।”
शेखर ने कहा, “नुसरत को पता था कि मैं भी आर. डी. बर्मन के करीब था। आर. डी. बर्मन ने मेरी पहली फिल्म ‘मासूम’ का संगीत तैयार किया था। इस तरह, नुसरत और मेरे बीच आर. डी. बर्मन के प्रति एक भावनात्मक संबंध था। उनकी आंखों और आवाज ने मुझे पूरी तरह से बांध लिया। उस पल मुझे ऐसा लगा जैसे मैं किसी दूसरी दुनिया में पहुंच गया हूं।”
फिल्म निर्माता ने लिखा, ''नुसरत मुझे एक ऐसे भावनात्मक स्तर पर ले जा रहे थे, जहां जीवन और मृत्यु का अंतर मिटता हुआ महसूस होता है। अगर दर्शक फिर से 'बैंडिट क्वीन' देखें, तो बेहमई नरसंहार के बाद वाले सीन पर ध्यान दें। उस हिस्से में बजने वाला संगीत उन्हें एक अलग अनुभव देगा।''
गौरतलब है कि 'बैंडिट क्वीन' 1994 में रिलीज हुई थी। इस फिल्म का निर्देशन शेखर कपूर ने किया था और यह चंबल की कुख्यात डाकू फूलन देवी के जीवन पर आधारित थी। फिल्म में सीमा विश्वास ने फूलन देवी का किरदार निभाया था। इसे देश-विदेश में काफी सराहा गया और भारतीय सिनेमा की प्रमुख फिल्मों में गिना जाता है।