धुरंधर: द रिवेंज की सफलता पर बॉलीवुड की चुप्पी का रहस्य
आदित्य धर की फिल्म 'धुरंधर: द रिवेंज' ने बॉक्स ऑफिस पर ₹1,400 करोड़ की कमाई कर एक नया रिकॉर्ड स्थापित किया है। इस सफलता के बावजूद, बॉलीवुड के बड़े सितारे चुप्पी साधे हुए हैं। दक्षिण भारतीय सिनेमा ने फिल्म की सराहना की है, जबकि हिंदी सिनेमा में एकता की कमी और वैचारिक मतभेदों की चर्चा हो रही है। जानें इस चुप्पी के पीछे के कारण और क्या यह बॉलीवुड के लिए एक चेतावनी है।
Apr 1, 2026, 17:35 IST
धुरंधर: द रिवेंज की ऐतिहासिक सफलता
आदित्य धर द्वारा निर्देशित फिल्म 'धुरंधर: द रिवेंज' ने बॉक्स ऑफिस पर ₹1,400 करोड़ की कमाई कर एक नया रिकॉर्ड स्थापित किया है, जो बिना चीन के बाजार के किसी भी हिंदी फिल्म के लिए असाधारण है। इस शानदार सफलता के बावजूद, एक सवाल उठ रहा है—बॉलीवुड इस बड़ी जीत पर चुप क्यों है?
दक्षिण भारतीय सिनेमा का समर्थन
दिलचस्प बात यह है कि जहां मुंबई के प्रमुख सितारे चुप्पी साधे हुए हैं, वहीं दक्षिण भारतीय सिनेमा ने इस फिल्म को सराहा है।
सुपरस्टार रजनीकांत ने आदित्य धर को 'बॉक्स ऑफिस का बाप' कहा, जबकि एस.एस. राजामौली ने रणवीर सिंह की अदाकारी को 'एक्टिंग का बेहतरीन नमूना' बताया।
कमल हासन, राम चरण, अल्लू अर्जुन, महेश बाबू और नागार्जुन जैसे दिग्गजों ने भी फिल्म की प्रशंसा की है।
ट्रेड विशेषज्ञों के अनुसार, दक्षिण के पांच राज्यों में फिल्म ने ₹200 करोड़ से अधिक की नेट कमाई की है, जो किसी भी शुद्ध बॉलीवुड फिल्म के लिए एक नया मील का पत्थर है।
बॉलीवुड की ठंडी प्रतिक्रिया
फिल्म की इस सफलता के बावजूद, हिंदी सिनेमा के प्रमुख सितारों की ओर से बधाई संदेशों की कमी है।
बड़े सितारों की चुप्पी: शाहरुख खान, सलमान खान और आमिर खान जैसे सितारों ने अब तक फिल्म पर कोई सार्वजनिक टिप्पणी नहीं की है। हालांकि, करण जौहर, अक्षय कुमार और आलिया भट्ट ने फिल्म की तारीफ की है, लेकिन अधिकांश इंडस्ट्री अभी भी 'सतर्क दूरी' बनाए हुए है।
एकता की कमी: फिल्म निर्माता मधुर भंडारकर ने इस पर नाराजगी जताते हुए कहा कि हमारी इंडस्ट्री में एकता की कमी है। जब कोई फिल्म इतनी सफल होती है, तो इसका लाभ सभी को मिलना चाहिए।
चुप्पी के पीछे के कारण
विशेषज्ञों और सोशल मीडिया पर इस चुप्पी के पीछे तीन मुख्य कारण बताए जा रहे हैं:
वैचारिक मतभेद: 'धुरंधर 2' पर वर्तमान सरकार और प्रधानमंत्री के महिमामंडन के आरोप लगे हैं। कुछ आलोचक इसे 'प्रोपेगैंडा' मानते हैं। बॉलीवुड का एक बड़ा हिस्सा अक्सर ऐसी विवादित फिल्मों पर टिप्पणी करने से बचता है।
असुरक्षा की भावना: राम गोपाल वर्मा ने इसे 'डर' और 'जलन' का नाम दिया है। उनका मानना है कि फिल्म की सफलता ने बॉलीवुड के पुराने समीकरणों को हिलाकर रख दिया है।
बदला हुआ दौर: प्रियदर्शन ने इस फिल्म के प्रभाव की तुलना 'शोले' से की है। शायद बॉलीवुड का एक हिस्सा इस नए 'धुरंधर युग' को स्वीकार करने के लिए मानसिक रूप से तैयार नहीं है।
निष्कर्ष: क्या खामोशी कुछ साबित करेगी?
सोशल मीडिया के युग में, जहां छोटी-छोटी उपलब्धियों का जश्न मनाया जाता है, ₹1,400 करोड़ की ब्लॉकबस्टर पर चुप्पी असामान्य है। दक्षिण भारतीय सितारों का इस फिल्म को अपनाना यह दर्शाता है कि अब सिनेमा की भाषा 'क्षेत्रीय' नहीं बल्कि 'कंटेंट' आधारित हो गई है। बॉलीवुड के बड़े सितारों की यह खामोशी उन्हें मुख्यधारा की जनता से दूर कर सकती है।