दिल्ली में इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल: सिनेमा की नई परिभाषा का अनावरण
दिल्ली में सिनेमा का जादू
नई दिल्ली, 26 मार्च। दिल्ली का सिनेमा जगत अब दक्षिण भारतीय सिनेमा के बड़े नामों की चमक से भर गया है। इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल के आरंभ होते ही, विदेशी कलाकार भारत मंडपम में आयोजित समारोह में शामिल होने के लिए पहुंच रहे हैं। इस कार्यक्रम में 'तुली भारत अध्ययन अनुसंधान केंद्र' (टीआरआईएस) के अध्यक्ष और लेखक नेविल तुली भी उपस्थित रहे, जिन्होंने सिनेमा की गहराई को समझाने का प्रयास किया।
दिल्ली इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल (आईएफएफडी) में टीआरआईएस के अध्यक्ष ने कहा, "इस प्रदर्शनी का मुख्य उद्देश्य यह है कि यदि आप किसी व्यवस्था में बदलाव लाना चाहते हैं, तो आपको जनता की सोच में बदलाव लाना होगा। लोग मानते हैं कि वे सिनेमा को समझते हैं, लेकिन जब वे इस प्रदर्शनी में आते हैं, तो उनका दृष्टिकोण बदल जाता है। यहां सिनेमा के इतिहास को प्रस्तुत किया गया है, जो दर्शकों के नजरिए को पल भर में बदल सकता है।"
उन्होंने आगे कहा, "यहां भारत का अनोखा रूप सिनेमा के माध्यम से देखने को मिलेगा। सिनेमेटिक संस्कृति केवल फिल्म देखने से नहीं बनती, बल्कि इसके हर पहलू को समझने से बनती है, जैसे सिनेमा की कला, उत्पादन प्रक्रिया और इतिहास। इन सभी पहलुओं को एक मंच पर लाने का प्रयास किया गया है।"
टीआरआईएस के अध्यक्ष ने यह भी बताया कि पहले हम किताबों से ज्ञान प्राप्त करते थे, लेकिन अब समय बदल चुका है। सोशल मीडिया के विभिन्न प्लेटफार्मों के माध्यम से इमेज को पढ़ना सीखना होगा। इमेज में शब्द नहीं होते, लेकिन उनका रंग और निर्माण की प्रक्रिया बहुत कुछ कहती है। यदि हम इसे पढ़ना सीख जाते हैं, तो सिनेमा को समझना हमारे लिए कठिन नहीं होगा।