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तमिलनाडु के सीएम विजय और पत्नी संगीता के तलाक की सुनवाई फिर टली, अगली तारीख 7 अगस्त

तमिलनाडु के मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय और उनकी पत्नी संगीता के तलाक मामले की सुनवाई एक बार फिर स्थगित कर दी गई है। चेंगलपट्टू फैमिली कोर्ट में दोनों पक्षों की अनुपस्थिति के कारण अगली सुनवाई 7 अगस्त को होगी। संगीता ने दिसंबर 2025 में तलाक की याचिका दायर की थी, जिसमें उन्होंने गुजारा भत्ता की भी मांग की थी। इस मामले ने राजनीतिक और मीडिया में काफी चर्चा बटोरी है।
 

तलाक मामले की सुनवाई में देरी




चेन्नई, 15 जून। तमिलनाडु के मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय और उनकी पत्नी संगीता के बीच चल रहे तलाक के मामले की सुनवाई एक बार फिर स्थगित कर दी गई है। चेंगलपट्टू फैमिली कोर्ट में सोमवार को इस मामले की सुनवाई होनी थी, लेकिन दोनों पक्षों के अदालत में उपस्थित न होने के कारण इसे आगे बढ़ाना पड़ा। अब इस मामले की अगली सुनवाई 7 अगस्त को होगी।


सोमवार को चेंगलपट्टू फैमिली कोर्ट में जब सुनवाई हुई, तो न तो मुख्यमंत्री विजय और न ही उनकी पत्नी संगीता अदालत में मौजूद थीं। हालांकि, दोनों पक्षों के वकील अदालत में उपस्थित रहे और उन्होंने अपनी दलीलें पेश कीं। दोनों की अनुपस्थिति को देखते हुए कोर्ट ने अगली तारीख तय की।


यह पहली बार नहीं है जब इस मामले की सुनवाई टली है। इससे पहले भी कई बार विजय और संगीता व्यक्तिगत रूप से अदालत में पेश नहीं हुए थे। दोनों पक्षों ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए सुनवाई में शामिल होने की अनुमति मांगी थी। बताया गया है कि मुख्यमंत्री पद की जिम्मेदारियों के कारण विजय को सुरक्षा प्रोटोकॉल का पालन करना पड़ता है। इससे पहले अदालत ने दोनों पक्षों की दलीलों पर विचार करते हुए मामले की सुनवाई 15 जून तक के लिए स्थगित कर दी थी।


संगीता ने दिसंबर 2025 में चेंगलपट्टू फैमिली कोर्ट में तलाक की याचिका दायर की थी। उन्होंने अपनी याचिका में शादी को समाप्त करने की मांग करते हुए कहा था कि पति-पत्नी के बीच ऐसे मतभेद उत्पन्न हो गए हैं जिन्हें सुलझाना संभव नहीं है। इसके साथ ही उन्होंने गुजारा भत्ता देने की भी मांग की थी।


तमिलनाडु के मुख्यमंत्री विजय, जो कि एक प्रसिद्ध अभिनेता रह चुके हैं, ने राजनीति में कदम रखा और टीवीके के प्रमुख बने। मुख्यमंत्री बनने के बाद उनकी सार्वजनिक छवि और भी मजबूत हुई है। इस मामले के चलते उनका निजी जीवन लगातार चर्चा का विषय बना हुआ है, और राजनीतिक विश्लेषक तथा मीडिया संस्थान इस मामले की हर सुनवाई पर नजर रखे हुए हैं.