गुजराती सिनेमा का जादू: 25 साल बाद फिर से पर्दे पर लौट रही 'मैंयरमां मनडू नथी लागतूं'
गुजराती फिल्म का पुनः आगमन
सूरत। हाल ही में बॉलीवुड फिल्म 'सैयारा' ने दर्शकों का दिल जीत लिया है और शानदार कलेक्शन किया है। लेकिन इससे पहले, 25 साल पहले एक गुजराती फिल्म ने भी दर्शकों के दिलों में खास जगह बनाई थी, जिसका नाम है 'मैंयरमां मनडू नथी लागतूं'।
यह फिल्म इतनी सफल रही कि यह लगातार 52 हफ्तों तक सिनेमाघरों में चली। इसे और अधिक समय तक चलाया जा सकता था, लेकिन अन्य फिल्मों को मौका देने के लिए इसे हटा दिया गया। उस समय, दर्शकों की लंबी कतारें टिकट खरीदने के लिए लगती थीं और कई लोग इसे ब्लैक में देखने जाते थे।
फिल्म की संवेदनशीलता ने दर्शकों को भावुक कर दिया था, और क्लाइमेक्स के दौरान कई सिनेमाघरों में महिलाएं बेहोश भी हो गई थीं। अब, यह फिल्म एक बार फिर से 5 सितंबर 2025 को सिनेमाघरों में लौटने के लिए तैयार है।
यह संभवतः पहली बार था जब किसी गुजराती फिल्म को इतना प्यार और जबरदस्त रिस्पॉन्स मिला। फिल्म के निर्देशक और निर्माता जशवंत गांगाणी थे, जो सूरत के प्रसिद्ध स्क्रिप्ट राइटर हैं। फिल्म में मुख्य भूमिकाएं निभाने वाले कलाकार थे हितेन कुमार और आनंदी त्रिपाठी।
फिल्म के कुछ लोकप्रिय गाने अरविंद बारोट ने गाए थे, और बाल कलाकार के रूप में तृषारिका राज्यगुरु ने भी अभिनय किया था। यह फिल्म गांगाणी फिल्म प्रोडक्शन के बैनर तले रिलीज हुई थी।
जशवंत गांगाणी ने बताया कि उनके दोस्तों और छोटे भाई राज गांगाणी के साथ इस फिल्म को फिर से रिलीज करने की चर्चा लंबे समय से चल रही थी। उन्होंने कहा कि फिल्म की कहानी आज भी उतनी ही प्रासंगिक है।
फिल्म की कहानी राम (हितेन कुमार) और रतन (आनंदी त्रिपाठी) के प्यार के इर्द-गिर्द घूमती है। शादी के समय राम को कैंसर का पता चलता है, जिससे शादी अधूरी रह जाती है। लेकिन रतन का प्यार इतना गहरा है कि वह राम का इंतजार करती है।
भगवान में उसकी आस्था के कारण राम का कैंसर ऑपरेशन सफल होता है और कहानी सुखद अंत पर समाप्त होती है। इस फिल्म ने कई परिवारों को टूटने से बचाया। हम 5 सितंबर को 'मैंयरमां मनडू नथी लागतूं' को फिर से रिलीज कर रहे हैं।
हितेन कुमार ने कहा कि 25 साल बाद फिल्म का फिर से रिलीज होना पुरानी यादों को ताजा कर रहा है। शूटिंग के दौरान बिताए गए मजेदार पलों की यादें भी ताजा हो गई हैं।
आनंदी त्रिपाठी, जो मध्य प्रदेश के इंदौर से हैं, ने कहा कि उन्हें गुजराती नहीं आती थी, लेकिन इस फिल्म के बाद उन्होंने 17 गुजराती फिल्मों में काम किया।
तृषारिका राज्यगुरु ने इस फिल्म में रतन की भतीजी सोनल का किरदार निभाया था। अब वह एक युवा कलाकार बन चुकी हैं और चाहती हैं कि जशवंत गांगाणी उन्हें रतन का किरदार निभाने का मौका दें।
अरविंद बारोट ने कहा कि इस फिल्म के गाने गुजराती संस्कृति और पारिवारिक भावनाओं को दर्शाते हैं। ये गाने आज भी यूट्यूब पर लोकप्रिय हैं।