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क्या हैं वो गाने जो भारतीय सिनेमा की ब्लॉकबस्टर फिल्मों का हिस्सा बने?

भारतीय सिनेमा में कई ऐसी फिल्में हैं, जिनके गानों ने उनकी सफलता में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। हाल ही में रिलीज हुई फिल्म ‘हनुमान अंश’ भी इसी श्रेणी में आती है। इस लेख में हम उन प्रमुख फिल्मों के बारे में जानेंगे, जिनके गाने उन्हें और भी खास बनाते हैं। जानें कैसे भक्ति गीतों और सदाबहार संगीत ने इन फिल्मों को ब्लॉकबस्टर बनाया।
 

गानों का जादू: भारतीय सिनेमा की सफल फिल्मों की कहानी



मुंबई, 07 सितंबर (वेब वार्ता)। भारतीय फिल्म उद्योग में कई ऐसी शानदार फिल्में बनी हैं, जिनके गानों ने उनकी सफलता में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। ये फिल्में अपने अद्भुत कंटेंट और लोकप्रिय संगीत के कारण बॉक्स ऑफिस पर हिट साबित हुई हैं। हाल ही में रिलीज हुई फिल्म ‘हनुमान अंश’ भी इसी श्रेणी में आती है।


बाबा नीम करौली के जीवन पर आधारित इस फिल्म को दर्शकों द्वारा काफी सराहा जा रहा है। वर्तमान में, फिल्म का क्रेज अपने चरम पर है। इसकी कहानी, कलाकारों का अभिनय, और बेहतरीन निर्देशन के साथ-साथ भजन ‘मैंने तेरे ही भरोसे हनुमान’ और ‘पार्वती (जब जिद पे आ गई पार्वती...)’ जैसे गाने इसकी लोकप्रियता के मुख्य कारण माने जा रहे हैं।


भजन ‘मैंने तेरे ही भरोसे हनुमान’ की लोकप्रियता हाल के समय में ‘जय संतोषी मां’ के भजनों और ‘कांतारा’ के ‘वराह रूपम’ के समान दिखाई दे रही है।


फिल्म ‘हनुमान अंश’ की सफलता के बीच, हम आपको उन प्रमुख भारतीय फिल्मों के बारे में बताएंगे, जिनके गानों ने उन्हें और भी खास बना दिया। ‘हनुमान अंश’ के चर्चित गाने मुख्य रूप से सोशल मीडिया, यूट्यूब शॉर्ट्स और रील्स के माध्यम से फैल रहे हैं, जबकि पुरानी फिल्मों में रेडियो, कैसेट और टीवी का योगदान था।


जय संतोषी मां (1975) – यह आध्यात्मिक विषयों पर बनी भारतीय सिनेमा की सबसे बड़ी फिल्मों में से एक मानी जाती है। कम बजट में बनी इस फिल्म ने उस समय की ब्लॉकबस्टर फिल्म शोले को कड़ी टक्कर दी थी। इसके भजन ‘मैं तो आरती उतारूं रे संतोषी माता की’ और अन्य भक्ति गीतों ने इसे जन-जन तक पहुंचाया।


अवतार (1983) – राजेश खन्ना और शबाना आजमी की इस फिल्म की अपार सफलता का श्रेय प्रसिद्ध भक्ति गीत ‘चलो बुलावा आया है, माता ने बुलाया है’ और किशोर कुमार के गाने ‘यह सारी दुनिया है आती जाती’ को जाता है। फिल्म के रिलीज के 43 साल बाद भी यह गीत हर माता के जगराते और नवरात्र पर्व की अनिवार्य धुन बना हुआ है।


आशिकी (1990) – इस फिल्म की सफलता का मुख्य कारण इसका सदाबहार संगीत था, जिसके इर्द-गिर्द निर्देशक महेश भट्ट ने पूरी कहानी बुनी थी। ‘धीरे धीरे से’ गाना इस फिल्म की सबसे बड़ी यूएसपी में से एक था। इसके मधुर संगीत ने 90 के दशक में इस फिल्म को जबरदस्त चर्चा में ला दिया। ‘नजर के सामने जिगर के पास’ ने सिनेमाघरों में फिल्म रिलीज होने से पहले ही कैसेट के जरिए घर-घर तक पहुंच चुके थे।


हम आपके हैं कौन (1994) – ‘दीदी तेरा देवर दीवाना’, ‘पहला-पहला प्यार’ और ‘जुता दे दो पैसे ले लो’ जैसे गानों ने भारतीय शादियों और त्योहारों के माहौल को पूरी तरह बदल दिया। इन गीतों ने न केवल लोकप्रियता हासिल की बल्कि फिल्म की सफलता में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।


विवाह (2006) – 2000 के दशक के मध्य में जब बॉलीवुड में पॉप और रीमिक्स गानों का चलन बढ़ रहा था, तब ‘विवाह’ के गानों ने अपनी सादगी और शास्त्रीय स्पर्श से लोगों को आकर्षित किया। ‘मिलन अभी आधा अधूरा है’, ‘मुझे हक है’, ‘दो अनजाने अजनबी’ जैसे गाने नायक और नायिका के बीच शुरुआती झिझक और आकर्षण को खूबसूरती से बयां करते हैं।


कांतारा (2022) – ऋषभ शेट्टी द्वारा निर्देशित कन्नड़ ब्लॉकबस्टर फिल्म ‘कांतारा’ की अभूतपूर्व सफलता में इसके गाने ‘वराह रूपम’ का सबसे बड़ा योगदान रहा है। इस गाने ने दर्शकों को सिनेमाघरों तक खींचा और फिल्म को सांस्कृतिक पहचान में बदल दिया।


भजन ‘मैंने तेरे ही भरोसे हनुमान’ बुंदेलखंड के प्रसिद्ध दृष्टिबाधित लोक कलाकार द्वारा गाया गया है। फिल्म की रिलीज के बाद यह इंटरनेट पर तेजी से वायरल हुआ। सुनील लोधी के तंबूरे के साथ गाए इस भजन को लोगों ने इतना पसंद किया कि यह गाना देश भर में हर किसी की जुबान पर चढ़ गया।


पार्वती (जब जिद पे आ गई पार्वती...) – गायक साधु तिवारी ने इस गीत में बुंदेली टच लाकर माता पार्वती के अडिग संकल्प और कठोर तप के बारे में बताया है। फिल्म रिलीज के बाद इस गाने ने न केवल इंस्टाग्राम पर लोकप्रियता हासिल की बल्कि युवा पीढ़ी को भी अपना दीवाना बना लिया।